रायपुर। दो शिक्षक पर निलंबन की गाज गिरी है। बिना अनुमति नियमित बीएड कोर्स करने पर जहां एक शिक्षिका को सस्पेंड कर दिया गया, तो वहीं नेटवर्क मार्केटिंग में शामिल एक प्रधान पाठक को भी निलंबित कर दिया गया है। दोनों मामलों में विभागीय जांच के बाद कार्रवाई की गई, जिसे प्रशासनिक व्यवस्था में जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

शिक्षिका पर निलंबन की गाज

बिना अनुमति नियमित कोर्स करना नियम विरुद्ध है। इसे लेकर शिक्षा विभाग की तरफ से कई बार आदेश जारी किये गये है। बावजूद कई शिक्षक इस नियम को ठेंगा दिखा देते हैं। ऐसे ही एक प्रकरण में शिक्षिका पर सस्पेंशन की गाज गिरी है।जानकारी के अनुसार, त्रिवेणी गोस्वामी शिक्षक एल.बी. के पद पर शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला दारगांव, विकासखंड धमधा, जिला दुर्ग में पदस्थ थीं। जांच में सामने आया कि सत्र 2014-15 के दौरान वे स्कूल में नियमित उपस्थिति दर्ज कराते हुए उसी समय भिलाई नायर समाजम कॉलेज सेक्टर 08 भिलाई, भिलाई से नियमित बीएड पाठ्यक्रम भी कर रही थीं और परीक्षा उत्तीर्ण की।

शासकीय सेवा में रहते हुए बिना अनुमति नियमित कॉलेज पाठ्यक्रम करना विभागीय दिशा-निर्देशों का उल्लंघन माना जाता है। कारण बताओ नोटिस जारी होने के बाद शिक्षिका द्वारा प्रस्तुत जवाब में यह तथ्य स्वीकार किया गया। इसके बाद जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय दुर्ग के प्रस्ताव पर उन्हें छत्तीसगढ़ सिविल सेवा नियमों के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय देवकर, जिला बेमेतरा निर्धारित किया गया है, जहां से उन्हें विभागीय प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

नेटवर्क मार्केटिंग वाली शिक्षिका सस्पेंड

धमधा ब्लॉक के शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला गोरपा की प्रधान पाठक कल्पना सेन को हर्बल लाइफ कंपनी की नेटवर्क मार्केटिंग गतिविधियों में शामिल पाए जाने पर सस्पेंड किया गया है। वहीं शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला दारगांव की शिक्षिका एलबी त्रिवेणी गोस्वामी को नियमित बीएड पाठ्यक्रम में उपस्थिति के मामले में पदीय दायित्वों की उपेक्षा का दोषी मानते हुए निलंबित किया गया।

धमधा ब्लॉक के शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला गोरपा में पदस्थ प्रधान पाठक कल्पना सेन के विरुद्ध शिकायत प्राप्त हुई थी कि वे नेटवर्क मार्केटिंग चिटफंड और हर्बल लाइफ कंपनी से जुड़कर उत्पादों एवं सेवाओं की बिक्री का व्यवसाय कर रही हैं। शिकायत पर धमधा बीईओ से जांच कराई गई।

विभाग का स्पष्ट संदेश

इन दोनों मामलों में की गई कार्रवाई शिक्षा विभाग के सख्त प्रशासनिक दृष्टिकोण को दर्शाती है। अधिकारियों का कहना है कि शासकीय सेवा में रहते हुए व्यक्तिगत अध्ययन, व्यावसायिक गतिविधियों या अन्य कार्यों के लिए निर्धारित नियमों का पालन अनिवार्य है।विभाग ने संकेत दिया है कि सेवा अनुशासन से जुड़े मामलों में भविष्य में भी नियमों के तहत सख्त कदम उठाए जाएंगे। प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की कार्रवाइयां शासकीय तंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करती हैं।

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By Chhattisgarh Kranti

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