सिग्नल जंप से हुई भीषण टक्कर! प्रमोशन पाकर मालगाड़ी से पैसेंजर ट्रेन चलाने वाले लोको पायलट की हुई मौत..

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर रेल हादसे में कमिशन ऑफ रेलवे सेफ्टी (CRS) की विस्तृत जांच शुरू होने से पहले रेलवे की पांच सदस्यीय टीम ने अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सौंप दी है। शुरुआती रिपोर्ट में यह बड़ा खुलासा हुआ है कि हादसे में शामिल लोको पायलट विद्या सागर एक माह पहले तक मालगाड़ी चलाते थे। हाल ही में प्रमोशन देकर उन्हें पैसेंजर ट्रेन की जिम्मेदारी दी गई थी।

रेलवे की रिपोर्ट के मुताबिक, जिस स्थान पर यह हादसा हुआ, वहां ट्रैक में तीव्र कर्व (घुमाव) है। प्राथमिक जांच में माना जा रहा है कि लोको पायलट ने दूसरी लाइन का सिग्नल देखकर ट्रेन की स्पीड बढ़ा दी थी, और जब सामने मालगाड़ी दिखाई दी तो उन्होंने एमरजेंसी ब्रेक लगाने की कोशिश की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

सिग्नल जंप बना हादसे की वजह
अफसरों की रिपोर्ट में साफ बताया गया है कि मेमू ट्रेन ने खतरे का सिग्नल पार किया, जिसके चलते यह टक्कर हुई। इसके लिए लोको पायलट विद्या सागर और उनकी असिस्टेंट रश्मि राज को ट्रेन को समय पर नियंत्रित न कर पाने का जिम्मेदार माना गया है। हादसे में विद्या सागर की मौत हो चुकी है, जबकि रश्मि राज गंभीर रूप से घायल हैं और अपोलो हॉस्पिटल में इलाजरत हैं।

ट्रेन की रफ्तार और ब्रेकिंग पॉइंट
प्रारंभिक रिपोर्ट में बताया गया कि गतौरा स्टेशन से रवाना होने के बाद ट्रेन लगभग 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही थी। इससे पहले के स्टेशनों में यही ट्रेन 76 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही थी। सामने मालगाड़ी दिखने पर लोको पायलट ने ब्रेक लगाया, लेकिन ट्रैक के घुमाव और दूरी कम होने के कारण टक्कर टालना संभव नहीं हो सका।

CRS जांच और पूछताछ शुरू
रेलवे ने इस मामले की विस्तृत जांच कमिशन ऑफ रेलवे सेफ्टी (CRS) को सौंपी है। संरक्षा आयुक्त बी.के. मिश्रा बिलासपुर पहुंच गए हैं। वे तीन दिनों तक घटनास्थल और संबंधित सभी तकनीकी पहलुओं की जांच करेंगे। मिश्रा स्टेशन मास्टर, गार्ड, प्वाइंट्समैन, सिग्नल इंजीनियर, सेक्शन इंजीनियर और अन्य संबंधित कर्मियों के बयान दर्ज करेंगे।

गार्ड और असिस्टेंट लोको पायलट के बयान होंगे अहम
हादसे के प्रत्यक्षदर्शी मालगाड़ी के गार्ड शैलेश चंद्र गंभीर रूप से घायल हैं। असिस्टेंट लोको पायलट रश्मि राज भी अस्पताल में भर्ती हैं। CRS जांच में इन दोनों के बयान हादसे की असली वजह जानने में बेहद अहम माने जा रहे हैं।

रेलवे और राज्य सरकार ने शुरू की सहायता
रेलवे प्रशासन ने मृतकों के परिजनों और घायलों को तात्कालिक मुआवजा 50-50 हजार रुपए दिया है। बुधवार देर रात तक सीनियर डीसीएम अनुराग सिंह और कमर्शियल मैनेजर एस. भारतीयन ने सहायता केंद्र पर बैठकर चेक वितरण किया। राज्य शासन की ओर से भी सहायता राशि के चेक तैयार कर लिए गए हैं, जिन्हें आज से परिजनों को सौंपा जाएगा।

हादसे के बाद रातभर चला रेस्क्यू
हादसे के बाद स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने रेस्क्यू अभियान में सक्रिय भूमिका निभाई। रातभर क्रेन की मदद से पैसेंजर ट्रेन के डिब्बों को ट्रैक से हटाया गया। कई यात्रियों को ऊपरी बोगियों से सीढ़ियों के जरिए सुरक्षित उतारा गया।

अब निगाहें CRS की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि आखिर इस भयानक टक्कर की वास्तविक वजह क्या थी — मानवीय त्रुटि, तकनीकी खामी या सिग्नलिंग फेल्योर?

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By Chhattisgarh Kranti

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