रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजनीति में आगामी बजट सत्र को लेकर हलचल तेज हो गई है। छत्तीसगढ़ विधानसभा छत्तीसगढ़ विधानसभा का यह सत्र कई दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सत्र में जहां एक ओर वर्ष 2026–27 का बजट पेश किया जाएगा, वहीं धर्मांतरण से जुड़े बहुप्रतीक्षित विधेयक पर भी चर्चा की संभावना है। धर्म स्वातंत्र्य विधेयक पर नजरविधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह डॉ. रमन सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान संकेत दिए कि इस बजट सत्र में धर्मांतरण से संबंधित विधेयक सदन में प्रस्तुत किया जा सकता है। प्रदेश में धर्मांतरण के खिलाफ कानून लाने की चर्चा लंबे समय से चल रही थी। ऐसे में इस सत्र में “छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक” के आने की संभावना ने राजनीतिक सरगर्मी बढ़ा दी है।उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा विजय शर्मा ने भी इस विषय पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सरकार सभी आवश्यक तैयारियों में जुटी हुई है और विधेयक को लेकर गंभीर विचार-विमर्श जारी है। हालांकि आधिकारिक तौर पर विधेयक की प्रस्तुति की पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन संकेतों से इसकी संभावना प्रबल मानी जा रही है। 24 फरवरी को पेश होगा बजटबजट सत्र की शुरुआत 23 फरवरी से होगी, जिसकी औपचारिक शुरुआत राज्यपाल के अभिभाषण से होगी। राज्यपाल के अभिभाषण पर कृतज्ञता ज्ञापन प्रस्ताव पर चर्चा 25 फरवरी को निर्धारित की गई है।सत्र का सबसे महत्वपूर्ण दिन 24 फरवरी होगा, जब वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ओ.पी. चौधरी दोपहर 12:30 बजे वर्ष 2026–27 का बजट प्रस्तुत करेंगे। बजट में प्रदेश के विकास, अधोसंरचना, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार से जुड़े बड़े प्रावधानों की उम्मीद जताई जा रही है। कवासी लखमा को सत्र में शामिल होने की अनुमतिबजट सत्र की एक और महत्वपूर्ण खबर शराब घोटाले के आरोपी विधायक कवासी लखमा कवासी लखमा से जुड़ी है। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने जानकारी दी कि कवासी लखमा को सत्र की कार्यवाही में शामिल होने की अनुमति दे दी गई है। शर्तों के साथ मिली राहतविधानसभा अध्यक्ष के अनुसार, इस निर्णय से पहले महाधिवक्ता छत्तीसगढ़ से अभिमत प्राप्त किया गया। कानूनी राय के आधार पर कवासी लखमा को शर्तों के साथ अनुमति प्रदान की गई है। जारी शर्तों के अनुसार: विधायक को आगमन और प्रस्थान की सटीक सूचना देनी होगी✔ अपने सक्रिय मोबाइल नंबर की जानकारी देना अनिवार्य होगा✔ विधानसभा परिसर में मोबाइल फोन जमा करना होगा✔ सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित शर्तों का पालन करना होगा✔ सत्र के दौरान केवल उपस्थिति दर्ज कर सकेंगे✔ चल रहे प्रकरण पर सदन में कोई वक्तव्य नहीं दे सकेंगे हालांकि उन्हें अन्य विषयों या अपने क्षेत्र से जुड़े मुद्दे उठाने की अनुमति रहेगी। सत्र रहेगा राजनीतिक रूप से अहम राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह बजट सत्र सरकार और विपक्ष दोनों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। जहां सरकार विकास एजेंडा और विधायी पहल को सामने रखेगी, वहीं विपक्ष विभिन्न मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति बना सकता है। धर्म स्वातंत्र्य विधेयक की संभावित प्रस्तुति और कवासी लखमा की शर्तों के साथ उपस्थिति ने इस सत्र को पहले से अधिक चर्चित बना दिया है। आने वाले दिनों में सदन की कार्यवाही पर प्रदेशभर की नजरें टिकी रहेंगी। Post Views: 27 Please Share With Your Friends Also Post navigation पर्यटन स्थल टाइगर पॉइंट में भीषण आग, दर्जनों दुकानें जलकर खाक 90 हजार रुपये रिश्वत लेते फूड इंस्पेक्टर गिरफ्तार, दुकान आवंटन के एवज में मांग रहा था घूस