रायपुर। रायपुर स्थित छत्तीसगढ़ विधानसभा में जेलों में बंदियों की मौत का मुद्दा गुरुवार को प्रमुख रूप से गूंजा। प्रश्नकाल के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राज्य की जेल व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाते हुए सरकार से विस्तृत जवाब मांगा। भूपेश बघेल ने सदन में पूछा कि राज्य की जेलों में कुल कितनी मौतें हुई हैं। इसके साथ ही उन्होंने जेलों में क्षमता से अधिक कैदियों की समस्या पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य की जेलों में निर्धारित क्षमता से लगभग 150 प्रतिशत अधिक बंदी रखे जा रहे हैं, जिससे कैदियों के स्वास्थ्य और सुरक्षा पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। पूर्व मुख्यमंत्री ने कानून-व्यवस्था का मुद्दा उठाते हुए हत्या, लूट और फिरौती जैसे गंभीर अपराधों में कथित 35 प्रतिशत वृद्धि का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह स्थिति राज्य की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है और सरकार को इस दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए। इन सवालों के जवाब में उपमुख्यमंत्री एवं गृह विभाग का दायित्व संभाल रहे विजय शर्मा ने सदन को आधिकारिक आंकड़े उपलब्ध कराए। विजय शर्मा ने बताया कि जनवरी 2025 से जनवरी 2026 के बीच राज्य की जेलों में कुल 66 बंदियों की मौत दर्ज की गई है। उन्होंने आगे जानकारी देते हुए कहा कि इनमें से 18 मामलों में मजिस्ट्रेट जांच की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, जबकि 48 मामलों में जांच अभी प्रक्रियाधीन है। सरकार की ओर से यह आश्वासन भी दिया गया कि सभी मामलों की जांच नियमानुसार की जा रही है। बहस के दौरान भूपेश बघेल ने विशेष रूप से जीवन ठाकुर और पंकज साहू की मौत का मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि जीवन ठाकुर को फर्जी मामले में फंसाया गया था और जेल में उनके उपचार में लापरवाही बरती गई। बघेल ने कहा कि जीवन ठाकुर को न तो परिजनों से मिलने दिया गया और न ही डॉक्टर की सलाह के बावजूद अस्पताल में भर्ती कराया गया। इसके जवाब में विजय शर्मा ने कहा कि जीवन ठाकुर से जुड़ा मामला प्रश्न की निर्धारित अवधि के बाद का है, हालांकि उनकी मौत का मामला सूची में शामिल है। उन्होंने सदन में कहा कि जेल अधीक्षक द्वारा कोर्ट में प्रस्तुत तथ्यों के अनुसार, जीवन ठाकुर चिकित्सा संबंधी परहेज का पालन नहीं कर रहे थे और जेल प्रशासन द्वारा समय-समय पर उनका परीक्षण एवं उपचार किया गया। उपमुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि उपचार में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं की गई और आवश्यक दवाइयां उपलब्ध कराई गईं।सरकार के जवाब से असंतुष्ट विपक्षी विधायकों ने जीवन ठाकुर की मौत को लेकर सदन की समिति से जांच की मांग की। इस मांग को लेकर सदन में नारेबाजी और हंगामा हुआ। विपक्ष ने इस घटना को “सरकारी हत्या” करार देते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया।अंततः विपक्षी सदस्यों ने बहिर्गमन कर दिया, जिससे सदन का माहौल और अधिक गरमा गया। Post Views: 19 Please Share With Your Friends Also Post navigation धान खरीदी पर गर्भगृह में हंगामा, जोरदार नारेबाजी के बीच विपक्षी विधायक निलंबित, सदन से बाहर निकलकर… ड्रग क्वीन नव्या मलिक का मुद्दा सदन में गूंजा, भूपेश बघेल के सवाल पर जानें गृहमंत्री क्या बोले