उदयपुर। स्काई रिच एजुकेशन हायर सेकेंडरी स्कूल उदयपुर में भव्य आनंद मेला का आयोजन किया गया। सर्वप्रथम मुख्य अतिथि माननीय सिद्धार्थ सिंह जूदेव जनपद पंचायत अध्यक्ष उदयपुर समारोह के अध्यक्ष माननीय अखंड विधायक मंडल अध्यक्ष देवगढ़ अति विशिष्ट अतिथि अर्जुन सिंह बीडीसी मोहनपुर, श्याम चरण गुप्ता विद्यालय प्रबंधक, संस्था प्रमुख आचार्य राम प्रसाद गुप्ता, कल्पना भदोरिया, शांति राजवाड़े, सरस्वती सिंह प्रमिला पोर्ते, देशराज अग्रवाल, उत्तम सिंह सोनी, रघुवीर दास, शीतल दास, भूलन सिंह सरपंच मानपुर, बसंत सिंह, गजेंद्र पाल चौरसिया प्राचार्य नमूना कला ने मां सरस्वती के प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलित कर एवं फीता काटकर शिशु बाल आनंद मेला का भव्य शुभारंभ किया।


संस्था प्रमुख आचार्य रामप्रसाद गुप्ता ने अतिथियों का परिचय कराते हुए कहा इस प्रकार के रचनात्मक गतिविधियों से बच्चों के अन्तःकरण में छिपी प्रतिभा को निखारने का अवसर एक प्रयास है कार्यक्रम से व्यक्तित्व एवं नेतृत्व विकास का अवसर मिलता है।

आनंद मेला में भगवान शिव की परिवार सहित झांकी माता पिता पूजन झांकी, विभिन्न प्रकार के पाक व्यंजनों की स्टॉल, अनेकों प्रकार के खेल, जादू खेल, गणित, जीव विज्ञान, केमिस्ट्री फिजिक्स ,कृषि विज्ञान, जल संरक्षण ,जंगल बचाओ , पर्यावरण संरक्षण ,पर्यावरण प्रदूषण से संबंधित विविध मॉडल विज्ञान मॉडल माता-पिता पूजन से संबंधित चित्रो के प्रदर्शनी अनेकों प्रकार के क्राफ्ट ,भव्य और मनोहारी झांकी लगाई गई थी उक्त अवसर पर नन्हे मुन्ने भैया बहनों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए।


आनंद मेला में हजारों की संख्या में अभिभावक नगर के गणमान्य जन्म आसपास के गांव के ज्येष्ठ श्रेष्ठ माता बहनों बन्धुओं की उपस्थिति कार्यक्रम की गरिमा को बढ़ाएं उक्त अवसर पर उपस्थित मंच तथा मेला में पधारे जन समुदाय ने नन्हे नन्हे भैया बहनों के द्वारा तैयार किए गए व्यंजन खेल मॉडल चित्र तथा सांस्कृतिक कार्यक्रम का आनंद उठाया ऐसा लग रहा था जैसे शिक्षा संस्कृति और संस्कार का यह त्रिवेणी संगम स्कायरिच स्कूल का पवित्र प्रांगण बना हुआ था। आनंद मेला का मुख्य आकर्षण का केंद्र रामेश्वरम रामशिला जो भौगोलिक एवं आध्यात्मिकता का केंद्र बना था सभी ने उस तैरते पत्थर का अवलोकन तथा त्रेताकाल की रामसेतु को याद किया।


मुख्य अतिथि सिद्धार्थ सिंह देव ने आनंद मेला का अवलोकन कर कहा शिक्षा के अलावा भैया बहनों में व्यावसायिक दृष्टिकोण से उनमें नेतृत्व लाना, कम पूंजी से व्यवसाय कैसे करना तथा ग्राहक से किस प्रकार मधुर व्यवहार करना खेल के माध्यम से अपने कला का प्रदर्शन करना सांस्कृतिक कार्यक्रम में पौराणिक संस्कृति की झलक यह बतलाती है कि विद्यालय भारतीय संस्कृति को जीवन्त बनाये रखने में, इन भैया बहनों को संस्कार युक्त गुरुकुल शिक्षा पद्धति अनुसार तरासने में लगी हुई है जिसकी जितनी प्रशंसा करें कम है विद्यालय के शिक्षकों के द्वारा इस प्रकार का नेतृत्व क्षमता का विकास करने में योगदान की हम प्रशंसा करते हैं।


समारोह के अध्यक्ष अखंड विधायक ने सम्बोधित करते हुए कहा संस्था संस्कार व व्यक्तित्व निर्माण तथा नेतृत्व विकास का केंद्र है साथ ही इसी प्रकार आने वाले परीक्षा उत्सव में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन कर महाभारत के अर्जुन की भांति जिम्मेदार नागरिक का कर्तव्य निभाकर भारत को चरमोत्कृष्ट शिखर पर ले जाने में भी आपकी अहम भूमिका रहेगी। आनंद मेला का नगर में चर्चा का विषय बना हुआ है प्रत्येक परिवार की सहभागिता तथा सभी का आत्मीय ढंग से अभिनंदन विद्यालय परिवार के द्वारा तथा विद्यालय के भैया बहनों का प्रत्येक गतिविधि में सहभागिता के लिए आगंतुकों ने प्रशंसा की। आनंद मेला के अवसर पर वार्षिक खेलकूद ,बौद्धिक ,योगा गीत गायन प्रतियोगिता तथा अन्य प्रतियोगिताओं में प्राप्त प्रथम द्वितीय तृतीय स्थान भैया बहनों को मेडल तथा प्रशस्ति पत्र के द्वारा अतिथियों ने सम्मानित किया।

उक्त कार्यक्रम की तैयारी में विद्यालय परिवार के समस्त शिक्षक शिक्षिकाओं का सराहनीय योगदान रहा कार्यक्रम को मूर्त रूप देने में अनीता वर्मा को प्राचार्य आरुणि वर्मा प्रधानाचार्य तथा सोनू मानिकपुरी का योगदान विशेष रहा कार्यक्रम सफल संचालन दुविधा अली ने किया कार्यक्रम का समापन कल्याण मंत्र के साथ हुआ।

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By Chhattisgarh Kranti

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