CG: नशे की आगोश में फंसता युवा, पॉश इलाके में प्रतिबंधित दवाओं और इंजेक्शन का खुलेआम इस्तेमाल
कोरबा:- नशा इंसान का नाश करता है, हमारे सोचने समझने की क्षमता को खत्म कर देता है. नशे की वजह से घरेलू हिंसा और समाज में होने वाले अपराधों का ग्राफ बढ़ता है. नशे से होने वाले इन नुकसानों को जानते सभी हैं, लेकिन उसके बावजूद कुछ लोग नशा करने से बाज नहीं आते. छत्तीसगढ़ को विकास की रफ्तार देने वाला कोरबा शहर, इन दिनों नशे की गिरफ्त में आता जा रहा है. नशा करने वालों की संख्या तेजी से बढ़ रही है. शराब, पान, बीड़ी-सिगरेट और गुटखा के बाद अब युवा तेजी से नशीली दवाओं और इंजेक्शन की गिरफ्त में फंसते जा रहे हैं.
युवा और समाज के लिए खतरे की घंटी
दरअसल, कोरबा शहर के बीचो-बीच पॉश इलाके में नशे के आपत्तिजनक तरीकों का इस्तेमाल इन दिनों धडल्ले से किया जा रहा है. रामपुर में रोजगार कार्यालय के पीछे बड़े पैमाने पर प्रतिबंधित दवाओं की खाली शीशियां और इंजेक्शन का जखीरा बिखरा मिला है, असामाजिक तत्व और युवा इंजेक्शन के जरिए नशा ले रहे हैं. नशा लेने के बाद युवा इंजेक्शन सहित खाली शीशियों को खुलेआम पॉश इलाके में फेंककर निकल जाते हैं. क्षेत्र के लोगों ने नशे के इस पर कारोबार और प्रतिबंधित दवाओं के उपयोग की शिकायतें भी कर रखी हैं, लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं होने से सरेआम इस तरह का नशा न सिर्फ प्रचलित है, बल्कि इससे उत्पन्न बायोमेडिकल वेस्ट भी लोगों के लिए खतरे का सबब बनता जा रहा है. स्थानीय प्रशासन और पुलिस द्वारा नशे पर लगाम कसने की बातें तो कहीं जाती हैं. लेकिन इस तरह के कामों पर कोई प्रतिबंध लगता नजर नहीं आता है.
जानिए खतरे से जुड़ी पूरी कहानी
पुलिस अधीक्षक कार्यालय के ठीक बगल से एक रास्ता रामपुर कालोनी की ओर जाता है. यहां जिला रोजगार कार्यालय का दफ्तर मौजूद है. इस कार्यालय के पीछे बड़े पैमाने पर बायोमेडिकल वेस्ट का जखीरा बिखरा पड़ा है, लेकिन यह मेडिकल वेस्ट उस तरह का वेस्ट नहीं है, जो कि अस्पतालों से निकलता है. इस तरह के मेडिकल वेस्ट यहां मिल रहे हैं जिससे युवा नशा ले रहे हैं.रोजगार कार्यालय के पीछे इंजेक्शन और अलग-अलग तरह के दवाओं का जखीरा बिखरा हुआ है. खाली शीशी इस्तेमाल के बाद छोड़े गए हैं, यह इलाका इस तरह के नशे के इस्तेमाल के लिए एक तरह का हॉटस्पॉट जैसा है. आस-पास कुछ खाली खंडहर नुमा भवन हैं. इन भवनों का इस्तेमाल भी असामाजिक तत्वों द्वारा किया जाता है. ऐसे में यह भी बेहद आवश्यक है, कि इन इलाकों की सघनता से जांच की जाए, ताकि नशे की इस बेहद खतरनाक प्रवृत्ति पर लगाम लगाई जा सके.
बिना डॉक्टरी पर्चे के नहीं मिलनी चाहिए ये खतरनाक दवाएं
इस संबंध में चिकित्सक डॉ. ए सिद्दीकी ने बताया कि कुछ खास दवाओं का उपयोग आमतौर पर एलर्जी दूर करने के लिए किया जाता है. इससे नींद भी आती है. यदि किसी व्यक्ति ने अल्कोहल या अन्य किसी भी तरह का कोई नशा किया है. नशे को लेने के बाद यदि दवा को लिया जाता है. तब वह दूसरी तरह के नशे की क्षमता को बढ़ाता है. इस तरह की दवाएं शेड्यूल्ड दवा होती हैं. जिसे मेडिकल स्टोर द्वारा डॉक्टर के बिना प्रिस्क्रिप्शन के नहीं दिया जाना चाहिए.
प्रशासन को लेना चाहिए संज्ञान, यह खतरनाक प्रवृत्ति को बढ़ा रहा
अधिवक्ता अनूप स्वर्णकार कहते हैं, रामपुर और रोजगार कार्यालय के आसपास का इलाका बेहद सघन आबादी वाला इलाका है, लेकिन इसके बाद भी उस क्षेत्र में नशे की प्रवृत्ति बेहद बड़े पैमाने पर फैली हुई है. शहर में इस तरह के अवैध कारोबार संचालित हैं. युवा नशीली दवाओं के माध्यम से नशा ले रहे हैं. शिकायतों के बाद भी ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है. पुलिस को अपनी गश्त बढ़ानी चाहिए. इस तरह के नशे के कारोबार पर, इसके जो सरगना हैं. उनके खिलाफ ठोस कार्रवाई करनी चाहिए. इस तरह का नशा बेहद खतरनाक है. उस क्षेत्र के लोगों में कई बार दहशत का माहौल देखा गया है. युवा और समाज दोनों के लिए ही इस तरह का नशा बेहद खराब है, जानलेवा साबित हो सकता है.
शिकायतें मिली हैं, लगातार कार्रवाई भी जारी है: सिविल लाइन पुलिस
सिविल लाइन थाना प्रभारी नवीन पटेल का कहना है कि नशे के खिलाफ शिकायतें मिली हैं. पुलिस का भी प्रयास रहता है कि इस तरह के तरीकों पर कार्रवाई की जाए, जागरूकता भी फैलाई जाए. लगातार कार्रवाई भी की गई है. यदि कहीं इस तरह की परिस्थितियां है, तो जांच के बाद आगे भी ठोस कार्रवाई की जाएगी.