CG High Court : 26 साल बाद मिला इंसाफ: TI की मौत के बाद पत्नी ने लड़ी कानूनी लड़ाई, हाईकोर्ट ने किया बरी” बिलासपुर : न्याय में देर भले हो, लेकिन अंधेर नहीं — इस कहावत को सच कर दिखाया एक महिला ने, जिसने अपने दिवंगत पति की बेगुनाही साबित करने के लिए 26 वर्षों तक कानूनी लड़ाई लड़ी। यह मामला महासमुंद जिले के बसना थाना में पदस्थ तत्कालीन थाना प्रभारी (TI) गणेशराम शेंडे का है, जिन पर 1990 में रिश्वत मांगने का आरोप लगा था। 10 अप्रैल 1990 को गणेशराम शेंडे के खिलाफ एक व्यक्ति ने लोकायुक्त और एसपी से शिकायत की थी कि उन्होंने जमानत के एवज में 1,000 रुपये की रिश्वत मांगी थी। शिकायत के आधार पर लोकायुक्त ने जांच कर उन्हें दोषी ठहराते हुए 3 साल की सजा और 2,000 रुपये जुर्माने की सज़ा सुनाई थी। हालांकि, इस मामले में पीड़ित ने आरोप लगाया था कि रिश्वत की मांग जमानत मिलने के बाद की गई थी। इसी बिंदु को हाईकोर्ट ने गंभीरता से लिया और कहा कि “जब जमानत पहले ही मिल चुकी थी, तो उसके एवज में रिश्वत मांगने का कोई औचित्य नहीं बनता।” इस आधार पर हाईकोर्ट ने दिवंगत TI गणेशराम शेंडे को सभी आरोपों से बरी कर दिया। TI गणेशराम शेंडे का देहांत पहले ही हो चुका था, लेकिन उनकी पत्नी ने न्याय की उम्मीद नहीं छोड़ी और हाईकोर्ट में मामले की पैरवी जारी रखी। अंततः उन्हें अपने पति की बेगुनाही का प्रमाण मिला। यह मामला न केवल एक लंबी कानूनी लड़ाई का उदाहरण है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि सच्चाई के लिए डटे रहना आखिरकार इंसाफ दिला सकता है — भले ही उसमें सालों लग जाएं। Post Views: 128 Please Share With Your Friends Also Post navigation CG : व्याख्याता को 5 साल की सजा रहेगी बरकरार, दोषी शिक्षक की याचिका हुई खारिज, जानिये क्या है पूरा मामला Bilashpur Highcourt : रईसजादों के हाईवे जाम मामले में हाईकोर्ट सख्त, सीजे बोले– महंगी गाड़ियां जब्त क्यों नहीं की?