अंबिकापुर/मैनपाट। मैनपाट में बक्साइट खदान से प्रभावित ग्रामीणों को दिए जाने वाले मुआवजे के वितरण को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। लगभग 19 करोड़ रुपये के मुआवजे में कथित फर्जीवाड़े और अनियमितताओं की शिकायतों के बाद प्रशासन हरकत में आ गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर ने तत्काल जांच समिति का गठन किया है और जांच रिपोर्ट नियत समय के भीतर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। सूत्रों के अनुसार, मुआवजा वितरण प्रक्रिया में कई संदिग्ध मामलों की जानकारी मिली है। आरोप है कि जिन व्यक्तियों के नाम पर मुआवजा स्वीकृत किया गया, उनमें से कुछ के पास जमीन ही नहीं है। इतना ही नहीं, कुछ मामलों में निजी फार्म हाउस को कृषि भूमि दर्शाकर मुआवजा देने की तैयारी की बात भी सामने आई है। अधिकारियों पर कार्रवाई प्रशासन ने प्राथमिक स्तर पर सख्ती दिखाते हुए मैनपाट के तहसीलदार और संबंधित पटवारी को जिला कार्यालय अटैच कर दिया है। यह कदम जांच प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया बताया जा रहा है। फर्जीवाड़े के आरोप शिकायतों में यह भी उल्लेख किया गया है कि छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी के बेटे के फार्म हाउस को खेत बताकर मुआवजा देने का मामला भी जांच के दायरे में है। हालांकि, प्रशासन की ओर से इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं की गई है, लेकिन जांच समिति को सभी बिंदुओं पर तथ्य जुटाने के निर्देश दिए गए हैं। आरोपों के मुताबिक, 23 से अधिक ऐसे व्यक्तियों के नाम पर मुआवजा स्वीकृत करने की तैयारी थी, जिनके पास संबंधित क्षेत्र में कोई भूमि रिकॉर्ड नहीं है। इससे मुआवजा प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों में आक्रोश मुआवजा वितरण में गड़बड़ी की खबर सामने आने के बाद प्रभावित ग्रामीणों में नाराजगी देखी जा रही है। मैनपाट के उरंगा गांव के 220 और बरिमा गांव के 24 लोगों को मुआवजा दिया जाना प्रस्तावित है। ग्रामीणों का कहना है कि वास्तविक प्रभावितों को न्याय मिलना चाहिए और किसी भी तरह के फर्जी दावों पर रोक लगनी चाहिए। जांच समिति को निर्देश कलेक्टर ने गठित जांच समिति को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सभी भूमि अभिलेख, पात्रता सूची और मुआवजा स्वीकृति से जुड़े दस्तावेजों की गहन जांच की जाए। समिति को नियत समय के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। प्रशासन की सख्त चेतावनी प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि यदि जांच में अनियमितता या फर्जीवाड़ा साबित होता है, तो संबंधित अधिकारियों और लाभार्थियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, गलत तरीके से स्वीकृत मुआवजे की रिकवरी भी की जा सकती है। Post Views: 29 Please Share With Your Friends Also Post navigation सभी शराब दुकानों को बंद करने का ऐलान, इतने दिनों तक नहीं होगी बिक्री, इस वजह से जिला प्रशासन ने लिया बड़ा फैसला