बलौदाबाजार कोर्ट ने नाबालिग से दुष्कर्म के आरोपी को सुनाई 28 साल की सजा

बलौदाबाजार। जिले के हथबंद थाना क्षेत्र में एक नाबालिग बच्ची के साथ हुए दुष्कर्म के मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है. आरोपी को 28 साल के कठोर कारावास की सजा मिली है. यह फैसला सिर्फ एक सज़ा नहीं, बल्कि यह बताने का संदेश है कि नाबालिगों के साथ अपराध को लेकर पुलिस और न्यायालय का मूड क्या है.

19 मई 2024 की दोपहर हथबंद थाना में परिवार ने नाबालिग बच्ची के घर से गायब होने की शिकायत की. परिवार का कहना था कि लड़की को कोई बहला-फुसलाकर ले गया है. परिवार की शिकायत पर पुलिस ने अपराध क्रमांक 110/2024 के तहत रिपोर्ट दर्ज की. इन धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया.

केस दर्ज होने के बाद मुख्य विवेचना अधिकारी प्रधान आरक्षक अश्विनी वर्मा, आरक्षक उमाशंकर कुर्रे ने टीम बनाकर सबसे पहले बच्ची का लोकेशन ट्रैक करना शुरू किया. कॉल डिटेल, मोबाइल सर्विलांस, पुराने परिचितों की लिस्ट और गांव वालों से पूछताछ की गई. दो दिनों के भीतर नाबालिग, आरोपी के साथ होने का सुराग मिला. 48 घंटे की लगातार खोजबीन के बाद आरोपी गिरफ्तार हुआ. पुलिस ने उसी दिन लड़की को भी सुरक्षित बरामद कर लिया.

पुलिस ने पीड़िता को महिला अधिकारी की मौजूदगी में बयान दिलवाया. बयान स्पष्ट था और उसमें कोई विरोधाभास नहीं था. उसके बाद मेडिकल जांच हुई, जिसमें दुष्कर्म की पुष्टि हुई. ये दोनों बातें केस को मजबूत करने वाली थीं.

बचने की कोशिश में नाकाम आरोपी

अपर सत्र न्यायाधीश भाटापारा सतीश कुमार जायसवाल के कोर्ट में ट्रायल शुरू हुआ. बचाव पक्ष ने कई दलीलें दीं, लेकिन एक भी तर्क अदालत को भ्रमित नहीं कर पाया. जब अपराध नाबालिग से जुड़ा हो, अदालत विशेष रूप से सख्त रुख अपनाती है, यही इस केस में भी हुआ.

अपराध गंभीर, सजा कड़ी: बलौदाबाजार कोर्ट ने कहा कि आरोपी का अपराध न सिर्फ पीड़िता बल्कि पूरे समाज के खिलाफ है. इसलिए नरमी की कोई गुंजाइश नहीं. सजा इस प्रकार सुनाई गई.

हथबंद 19 मई 2024 को 363 और पॉक्सो एक्ट का केस दर्ज किया गया था. जिसमें नाबालिग बच्ची के साथ दुष्कर्म किया गया था. इसमें खिलौरा का रहने वाला 24 साल के आरोपी को गिरफ्तार किया गया. एक साल के अंदर इस मामले में कार्रवाई औऱ सुनवाई करते हुए कोर्ट ने आरोपी को 28 साल कारावास की सजा सुनाई है

एसपी गुप्ता ने आगे कहा “यह बहुत संवेदनशील मामला था. FIR दर्ज होते ही टीम को निर्देश दिए गए थे कि किसी तरह की देरी नहीं होनी चाहिए. आरोपी को जल्द गिरफ्तार किया गया, सभी साक्ष्य समय पर कोर्ट भेजे गए. नाबालिग पीड़िता को न्याय दिलाना हमारी प्राथमिकता थी. अदालत का फैसला उन सभी के प्रयासों का नतीजा है जिन्होंने इस केस पर दिन-रात मेहनत की.”

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By Chhattisgarh Kranti

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