ज्योतिष शास्त्र में शनि देव को न्याय और कर्मफल दाता माना गया है। आमतौर पर लोग शनि का नाम सुनते ही भयभीत हो जाते हैं, लेकिन वास्तविकता इसके बिल्कुल विपरीत है। यदि शनि कुंडली के विशेष भावों में मजबूत, उच्च या अनुकूल होकर विराजमान हो जाएं, तो वे रंक को भी राजा बना देते हैं और व्यक्ति को अकूत दौलत, मान-सम्मान व दीर्घायु प्रदान करते हैं। आइए जानते हैं कि कुंडली के वो कौन से भाव हैं जहाँ शनि देव कुबेर का भंडार खोल देते हैं, और उनके शुभ फल को और अधिक बढ़ाने के अचूक उपाय क्या हैं: इन भावों के शनि देते हैं ‘अकूत दौलत’ तृतीय भाव (3rd House) — पराक्रम और ऐश्वर्य तीसरे भाव में शनि देव को बेहद कारक और शुभ माना जाता है। यहाँ बैठकर शनि व्यक्ति को अपार साहसी और परिश्रमी बनाते हैं। धन योग: ऐसा व्यक्ति अपने दम पर, अपनी मेहनत और बाहुबल से शून्य से शुरुआत करके करोड़ों का साम्राज्य खड़ा करता है। इन्हें व्यापार और तकनीकी क्षेत्रों में अकूत सफलता मिलती है। षष्ठ भाव (6th House) — शत्रुहंता और अखंड लक्ष्मी छठे भाव (रोग, ऋण, शत्रु) में शनि देव ‘शत्रुहंता योग’ बनाते हैं। यहाँ बैठा शनि जातक के जीवन के सभी अवरोधों को नष्ट कर देता है। धन योग: ऐसे लोग कोर्ट-कचहरी, प्रतियोगिता, राजनीति या विवादित संपत्तियों से बहुत बड़ा धन लाभ कमाते हैं। शत्रुओं पर विजय प्राप्त कर ये लोग समाज में बहुत रसूखदार और अमीर बनते हैं। दशम भाव (10th House) — कर्म और राजपद दशम भाव शनि का अपना घर (कालपुरुष कुंडली के अनुसार) माना जाता है। यहाँ बैठे शनि देव व्यक्ति को ‘कर्मठ’ बनाते हैं। धन योग: यदि यहाँ शनि बलवान हों, तो जातक व्यापार, लोहा, मशीनरी, तेल, कोयला या राजनीति के क्षेत्र में शीर्ष पर पहुँचता है। ऐसे लोग धीरे-धीरे ही सही, लेकिन जीवन के उत्तरार्ध में अथाह संपत्ति के मालिक बनते हैं। इन्हें समाज में ‘किंगमेकर’ का दर्जा मिलता है। एकादश भाव (11th House) — सर्व सिद्धियाँ और महालाभ ग्यारहवां भाव ‘आय और लाभ’ का स्थान है। इस भाव में शनि देव की उपस्थिति को ज्योतिष में सबसे श्रेष्ठ धन प्रदायक माना गया है। धन योग: यहाँ बैठकर शनि व्यक्ति के लिए आय के एक से अधिक स्रोत (Multiple sources of income) खोल देते हैं। ऐसे जातक के पास नियमित रूप से धन का आगमन होता रहता है। ज़मीन-जायदाद और अचल संपत्ति के मामले में ये लोग बेहद भाग्यशाली होते हैं। शनि देव से शुभ फल प्राप्त करने के अचूक उपाय यदि आपकी कुंडली में शनि इन भावों में हैं, या आप शनि देव की कृपा से अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत करना चाहते हैं, तो निम्नलिखित उपाय बेहद प्रभावी सिद्ध होते हैं: कर्म प्रधान उपाय (शनि की मूल प्रकृति) मजदूरों और असहायों का सम्मान: शनि देव श्रम के देवता हैं। अपने अधीन काम करने वाले कर्मचारियों, नौकरों और समाज के गरीब वर्ग को कभी प्रताड़ित न करें। उन्हें समय पर पैसा दें और उनकी मदद करें।न्यायप्रिय और ईमानदार रहें: छल-कपट, सट्टेबाजी या किसी को धोखा देकर कमाया गया धन शनि देव बर्दाश्त नहीं करते। आपकी ईमानदारी ही शनि का सबसे बड़ा उपाय है। धार्मिक और व्यावहारिक उपाय पीपल वृक्ष की सेवा: हर शनिवार की शाम को पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक (चौमुखी) जलाएं और सात परिक्रमा करें। हनुमान आराधना: शनि देव ने हनुमान जी को वचन दिया था कि जो भी हनुमान जी की भक्ति करेगा, उसे शनि कभी प्रताड़ित नहीं करेंगे। इसलिए नियमित रूप से हनुमान चालीसा या बजरंग बाण का पाठ करें। शनि मंत्र का जाप: शनिवार की शाम को नीलमणि या रुद्राक्ष की माला से इस मंत्र का 108 बार जाप करें:“ॐ शं शनैश्चराय नमः” छाया दान करें: शनिवार के दिन एक कटोरी में सरसों का तेल लें, उसमें अपना चेहरा देखें और उस तेल को किसी डाकौत (शनि का दान लेने वाले) को दान कर दें या शनि मंदिर में रख आएं। विशेष नोट: शनि देव ‘शनैः-शनैः’ (धीरे-धीरे) फल देते हैं। उनके द्वारा दिया गया धन स्थायी और पीढ़ियों तक चलने वाला होता है। इसलिए धैर्य रखें और अपने कर्मों को शुद्ध रखें। आचार्य पं. गिरीश पाण्डेयएस्ट्रोलॉजर (एस्ट्रोसेज)अमरैया पारा पिथौरा महासमुंद छत्तीसगढ़ 7000217167 Post Views: 17 Please Share With Your Friends Also Post navigation कहीं आपका शुक्र भी इन स्थानों पर तो नहीं? वैवाहिक सुख और समृद्धि के लिए तुरंत करें ये 4 खास वैदिक उपाय