भारत और यूरोपीय संघ ने व्यापार संधि पर किए हस्ताक्षर, 18 साल का लंबा इंतजार हुआ खत्म

नई दिल्ली:- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को घोषणा की कि भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच बहुप्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर हस्ताक्षर हो गए हैं. प्रधानमंत्री ने इसे भारत और यूरोप की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच एक ऐतिहासिक साझेदारी बताते हुए कहा कि इससे व्यापार, निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे.

मदर ऑफ ऑल डील्स’ करार

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि लोग इस समझौते को “मदर ऑफ ऑल डील्स” यानी सबसे बड़ा व्यापारिक करार कह रहे हैं. उनके अनुसार, यह समझौता 140 करोड़ भारतीयों और करोड़ों यूरोपीय नागरिकों के लिए नए अवसर लेकर आया है. यह दुनिया की कुल सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के लगभग 25 प्रतिशत और वैश्विक व्यापार के करीब एक-तिहाई हिस्से को कवर करता है, जो इसकी वैश्विक अहमियत को दर्शाता है.

श्रम-प्रधान उद्योगों को मिलेगा लाभ

प्रधानमंत्री ने बताया कि इस मुक्त व्यापार समझौते से विशेष रूप से कपड़ा उद्योग, रत्न एवं आभूषण, चमड़ा तथा जूते-चप्पल जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों को बड़ा फायदा होगा. इन क्षेत्रों में निर्यात बढ़ने के साथ-साथ रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे. उन्होंने कहा कि यह समझौता भारत में विनिर्माण क्षेत्र को मजबूती देगा और सेवा क्षेत्र के विस्तार में भी मदद करेगा.

20 साल की बातचीत के बाद समझौता

करीब दो दशकों तक चली बातचीत और कई बार हुई देरी के बाद यह मुक्त व्यापार समझौता अब साइन हुआ है. इसके तहत भारत अपने बड़े और अब तक काफी हद तक सुरक्षित रहे बाजार को 27 देशों वाले यूरोपीय संघ के लिए खोलेगा. बदले में भारतीय निर्यातकों को यूरोपीय बाजार में बेहतर पहुंच मिलेगी.

यूरोपीय संघ भारत का सबसे बड़ा साझेदार

यूरोपीय संघ वर्तमान में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है. वित्त वर्ष 2024–25 में भारत और यूरोपीय संघ के बीच कुल व्यापार 136.5 अरब अमेरिकी डॉलर का रहा. विशेषज्ञों का मानना है कि इस समझौते के लागू होने के बाद द्विपक्षीय व्यापार में तेज़ी से वृद्धि होगी.

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By Chhattisgarh Kranti

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