Air India में नेतृत्व परिवर्तन की तैयारी, टाटा समूह नए सीईओ की तलाश में

Air India में नेतृत्व परिवर्तन की तैयारी, टाटा समूह नए सीईओ की तलाश में

मुंबई:- एयर इंडिया की मालिक कंपनी टाटा सन्स अब अपनी एयरलाइंस कारोबार के लिए नए नेतृत्व की तलाश में जुट गई है. सूत्रों के मुताबिक, टाटा समूह के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने ब्रिटेन और अमेरिका की कम से कम दो बड़ी अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस के शीर्ष अधिकारियों से बातचीत की है. इन नामों पर विचार इसलिए हो रहा है क्योंकि मौजूदा सीईओ कैम्पबेल विल्सन के नेतृत्व में जमीनी स्तर पर बदलाव और क्रियान्वयन की रफ्तार से समूह पूरी तरह संतुष्ट नहीं है.

हालांकि कैम्पबेल विल्सन का कार्यकाल जून 2027 में समाप्त होना है, लेकिन जानकारों का कहना है कि उससे पहले ही एयर इंडिया को नया सीईओ मिल सकता है. यही नहीं, टाटा समूह की लो-कॉस्ट एयरलाइन एयर इंडिया एक्सप्रेस में भी नेतृत्व परिवर्तन की संभावना जताई जा रही है. इसके मौजूदा सीईओ अलोके सिंह का कार्यकाल भी 2027 में खत्म होगा .

चंद्रशेखरन हाल के महीनों में विल्सन के साथ नियमित रूप से प्रदर्शन समीक्षा बैठकें कर रहे हैं और नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया सीधे तौर पर उन्हीं के स्तर से संचालित हो रही है. टाटा सन्स ने इस विषय पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है.

कैम्पबेल विल्सन का कार्यकाल: उपलब्धियां और चुनौतियां

न्यूजीलैंड के नागरिक कैम्पबेल विल्सन जुलाई 2022 में एयर इंडिया के सीईओ बने थे. उन्होंने पांच साल की एक महत्वाकांक्षी परिवर्तन योजना पेश की थी, जिसका उद्देश्य एयर इंडिया को फिर से एक वैश्विक प्रतिस्पर्धी एयरलाइन बनाना और उसकी वित्तीय स्थिति सुधारना था.

उनके कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धियों में विस्तारा का एयर इंडिया में सफल विलय शामिल है. इसके अलावा, एयर इंडिया ने अपने बेड़े का विस्तार किया और कुछ प्रमुख मेट्रो रूट्स पर बाजार अग्रणी इंडिगो को भी पीछे छोड़ा.

हालांकि, वैश्विक सप्लाई चेन संकट के कारण नई विमानों की डिलीवरी और पुराने विमानों के नवीनीकरण में भारी देरी हुई. खुद विल्सन ने हाल ही में कहा था कि एयर इंडिया को अब तक 28 नए विमान मिलने चाहिए थे, लेकिन कंपनी को एक भी नया विमान नहीं मिल पाया . इसका सीधा असर सेवा गुणवत्ता, समय पर उड़ानों (ऑन-टाइम परफॉर्मेंस) और यात्री अनुभव पर पड़ा.

बढ़ी निगरानी और नियामकीय दबाव

पिछले साल हुए एक विमान हादसे के बाद, जिसमें 260 लोगों की मौत हुई थी, एयर इंडिया की गतिविधियां कड़ी जांच के दायरे में आ गईं . हालांकि प्रारंभिक जांच में विमान या इंजीनियरिंग प्रक्रियाओं में खामी नहीं पाई गई, लेकिन इसके बाद सरकारी अधिकारियों ने सीधे टाटा समूह के शीर्ष नेतृत्व से संवाद करना शुरू कर दिया, जिससे विल्सन की भूमिका कमजोर होती दिखी.

इसके अलावा, नागर विमानन महानिदेशालय ने कैम्पबेल विल्सन समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों को कथित नियम उल्लंघन और अनुपालन में चूक के मामलों में शो-कॉज नोटिस जारी किए हैं. इनमें एक मामला ऐसा भी शामिल है, जिसमें एक्सपायर्ड लाइसेंस वाले विमान का संचालन किया गया था.

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