बिगड़ता लाइफ स्टाइल, देरी से शादी और लेट बच्चा भी ब्रेस्ट कैंसर का कारण

हर साल अक्टूबर महीने को स्तन कैंसर जागरूकता माह के रूप में मनाया जाता है. ताकि, तेजी से बढ़ रहे स्तन कैंसर के प्रति महिलाओं को जागरूक किया जा सके. बावजूद इसके स्तन कैंसर के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं, जो महिलाओं के लिए एक गंभीर समस्या बनती जा रही है. ऐसे में स्तन कैंसर की जागरूकता को लेकर उत्तराखंड में भी अभियान चलाए जा रहे हैं.

तमाम अभियानों के जरिए महिलाओं को स्तन कैंसर के प्रति जागरूक किया जा रहा है, लेकिन तेजी से बदलते लाइफ स्टाइल और लेट शादी या फिर लेट बच्चा पैदा होना भी स्तन कैंसर के लिए कई बार जिम्मेदार देखा गया हैं. यही वजह है कि डॉक्टर्स महिलाओं को स्तन कैंसर से बचाव के लिए बदलते लाइफस्टाइल को सही करने पर जोर दे रहे हैं.

स्तन कैंसर भारत देश ही नहीं दुनियाभर के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है. जिसकी मुख्य वजह यही है कि आज भी महिलाएं इसके बीमारी के प्रति जागरूक नहीं है. जिसके चलते हर साल लाखों महिलाओं की मौत हो रही है. भारत में साल 1990 के दशक में स्तन कैंसर चौथा सबसे आम कैंसर था, लेकिन अब भारतीय महिलाओं में सबसे आम कैंसर और एक प्रमुख वैश्विक स्वास्थ्य चिंता बन गया है.

खराब लाइफस्टाइल से बढ़ रहे कैंसर के मामले: वंशानुगत मोटापा, खराब जीवन शैली, अत्यधिक अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों का सेवन, धूम्रपान और शराब का इस्तेमाल समेत अन्य कारणों की वजह से भी स्तन कैंसर होने की संभावना बढ़ जाती है. यही वजह है कि हर साल अक्टूबर महीने को स्तन कैंसर जागरूकता माह के रूप में मनाया जाता है. ताकि, महिलाओं को स्तन कैंसर के प्रति जागरूक किया जा सके.

नेचर जर्नल में प्रकाशित शोध ने जताया ये अनुमान: नेचर जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन के मुताबिक, अगले 10 सालों में भारतीय महिलाओं में स्तन कैंसर के आंकड़ों में हर साल 50 हजार की वृद्धि होने की संभावना है. महिलाओं में स्तन कैंसर की जनसंख्या के आधार पर बताया गया है. जिसके तहत 25 से 49 साल उम्र की महिलाओं में घटना दर 32.8 फीसदी, 50 से 69 साल उम्र की महिलाओं में 27.9 फीसदी और 70 साल से अधिक उम्र की महिलाओं में 23.4 फीसदी है.

कैंसर मरीजों में संख्या में इजाफा: इसके साथ ही साल 2019 में स्तन कैंसर मरीजों की संख्या 2,00,218 थी. जबकि, स्तन कैंसर की वजह से 74,481 मरीजों की मौत हुई थी, लेकिन मरीजों का आंकड़ा साल 2023 में बढ़कर 2,21,579 हो गई. साथ ही इस बीमारी से होने वाली मौतों की संख्या भी बढ़कर 82,429 हो गई.

क्या हैं स्तन कैंसर के शुरुआती लक्षण?

स्तन पर गांठ या फिर स्किन का मोटा होना.
स्तन के आस पास के हिस्सों में कुछ अलग महसूस होना.

निप्पल के साइज में बदलाव या चपटा दिखना या फिर निप्पल अंदर की ओर मुड़ा होना.

स्तन की स्किन के रंग में बदलाव, गोरे स्किन वाले लोगों में स्तन की त्वचा गुलाबी या लाल रंग का नजर आना.

भूरी या काली त्वचा वाले लोगों में स्तन की त्वचा छाती या अन्य त्वचा की तुलना में गहरे रंग या फिर लाल या बैंगनी नजर आना.

स्तन के आकार के साथ आकृति या बनावट में बदलाव दिखना.

स्तन के ऊपर की स्किन में बदलाव दिखना. स्किन में गड्ढे पड़ना या फिर संतरे के छिलके जैसी दिखना.

स्तन की स्किन का छिलना या फिर पपड़ी बनना.

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By Chhattisgarh Kranti

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