नई दिल्ली:– A,B, AB और O प्रमुख ब्लड ग्रुप होते हैं. लगभग हम सभी इन्हीं चारों में से किसी एक ब्लड ग्रुप से ही होते हैं. वहीं शादी के लिए कपल्स के समान या अलग ब्लड ग्रुप होने से कुछ खास फर्क नहीं पड़ता. न ही इसका असर गर्भधारण करने में आता है. फाइनेंशियल एक्सप्रेस’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक रक्त का एक प्रकार आपके फैमिली प्लानिंग पर असर डाल सकता है. वह है रक्त में रीसस फैक्टर (Rh) की नामौजूदगी. एक्सपर्ट्स के मुताबिक Rh रेड ब्लड सेल्स ( RBC) में पाया जाने वाला एक प्रोटीन होता है. जिन लोगों के शरीर में यह मौजूद होता है उन्हें Rh-पॉजिटिव कहा जाता है, वहीं जिन लोगों में यह नहीं होता है वे Rh-निगेटिव माने जाते हैं. अधिकतर लोग Rh-पॉजिटिव होते हैं. वहीं शादी के बाद बच्चा पैदा करने के लिए इसकी मुख्य भूमिका भी होती है. ऐसे में कपल्स को एक-दूसरे के Rh स्टेटस के बारे में जरूर जानना चाहिए. अगर दोनों पार्टनर के जींस Rh-पॉजिटिव हैं तो उनके बच्चे भी Rh-पॉजिटिव होते हैं. जब लड़की Rh-निगेटिव और लड़का Rh-पॉजिटिव होता है तो इसे दोनों के ठीक नहीं माना जाता है. इसे Rh Incompatibility कहा जाता है, जिससे प्रेग्नेंसी में दिक्कत आ सकती है. इस तरह के कपल जब कंसीव करते हैं तो उनका बच्चा पिता से Rh-पॉजिटिव ब्लड लेता है. माना जाता है कि गर्भावस्था के समयकोख में मौजूद बच्चे से Rh फैक्टर वाले कुछ सेल्स माता के खून में जाने लगते हैं. वहीं Rh-निगेटिव होने के कारण माता के इम्यून सिस्टम इसे बाहरी तत्व समझकर एंटीबॉडीज का उत्पादन करने लगता है, जो इन सेल्स को नष्ट करने का काम करते हैं. ये एंटीबॉडी कोख में बच्चे के शरीर में भी जाने लगते हैं. अगर बच्चा Rh-निगेटिव पैदा होता है तो इससे कोई समस्या नहीं होती है. वहीं अगर बच्चा Rh-पॉजिटिव होता है तो एंटीबॉडीज Rh ले जाने वाले उसके रेड ब्लड सेल्स पर अटैक करेंगे, जिसस जिससे वे फट जाएंगी. ऐसे में नवजात शिशु का हेमोलिटिक या Rh की बीमारी हो सकती है. बता दें कि Rh Incompatibility वाले कपल्स में इस समस्या से बचने के लिए डॉक्टर Rh इम्यून ग्लोबुलिन का वैक्सीन लगाते हैं. Post Views: 216 Please Share With Your Friends Also Post navigation वृद्ध की फांसी के फंदे पर लटकती मिली लाश….जांच मे जुटी पुलिस छत्तीसगढ़ के घरों में पहुंचेगी पाइपलाइन से कुकिंग गैस, पीएम मोदी ने दी जानकारी,,जानिए कब से शुरु होगी यह प्रोजेक्ट…