Shardiya Navratri 2025 : आज से हुई शारदीय नवरात्रि की शुरुआत, कलश स्थापना की पूजा विधि और शुभ मुहूर्त जानें यहां दिल्ली: आज यानी 22 सितंबर से शारदीय नवरात्रि की शुरुआत हो चुकी है। यह पावन पर्व आश्विन शुक्ल प्रतिपदा तिथि से शुरू होता है और नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। पहले दिन कलश स्थापना कर विधिवत पूजा आरंभ की जाती है। नवरात्रि में कलश स्थापना का महत्व नवरात्रि में कलश को मातृशक्ति का प्रतीक माना जाता है। नवरात्रि के नौ दिनों तक यह कलश पूजा स्थल पर स्थापित रहता है, जो सभी देवी-देवताओं के वास का प्रतीक माना जाता है। कलश स्थापना के साथ ही ब्रह्मा, विष्णु, महेश और अन्य देवी-देवताओं को भी इस पूजा का साक्षी बनाया जाता है। कलश स्थापना से शक्ति की आराधना की पूर्ण शुरुआत होती है। शुभ तिथि और मुहूर्त आश्विन शुक्ल प्रतिपदा तिथि प्रारंभ: सोमवार, 22 सितंबर, रात 01:23 बजेआश्विन शुक्ल प्रतिपदा तिथि समाप्त: मंगलवार, 23 सितंबर, रात 02:55 बजेशुक्ल योग: सुबह से शाम 7:59 बजे तकब्रह्म योग: शाम 7:59 बजे से पूरी रात नक्षत्र उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र – प्रातःकाल से सुबह 11:24 बजे तकहस्त नक्षत्र – 11:24 बजे के बाद से पूरे दिन तककलश स्थापना के विशेष मुहूर्तअमृत मुहूर्त (सर्वोत्तम): सुबह 06:09 से सुबह 07:40 बजे तकशुभ मुहूर्त (उत्तम): सुबह 09:11 से सुबह 10:43 बजे तकअभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:49 से 12:38 बजे तक कलश स्थापना की सामग्री मिट्टी/पीतल का कलशगंगाजल, जौ, सात अनाजआम, अशोक और केले के पत्तेनारियल (जटा वाला), रोली, चंदन, अक्षतधूप, दीप, घी, कपूर, बाती, इलायचीपान, सुपारी, लाल फूल, फल, पंचमेवारक्षासूत्र, मां दुर्गा का ध्वज, मिठाई आदि कलश स्थापना की विधि स्नान व संकल्प: सुबह स्नान कर पूजा का संकल्प लें।चौकी सजाएं: ईशान कोण में चौकी रखें, पीला कपड़ा बिछाएं।अन्न बिछाएं: उस पर सात प्रकार के अनाज रखें और कलश स्थापित करें।कलश सजाएं: कलश में गंगाजल भरें, उसमें अक्षत, फूल, सुपारी, सिक्का, दूर्वा आदि डालें।पत्ते और नारियल रखें: आम/अशोक के पत्ते और ढक्कन के ऊपर सूखा नारियल रखें।कलश पूजन: गणेश, वरुण और अन्य देवी-देवताओं की पूजा करें।जौ बोएं: कलश के पास मिट्टी डालकर उसमें जौ बोएं और रोज पानी दें।अखंड ज्योति जलाएं: एक दीपक जलाएं जो पूरे नवरात्रि भर जले। जौ का प्रतीकात्मक महत्व नवरात्रि में बोए गए जौ का हरा होना समृद्धि, सुख और शुभता का प्रतीक माना जाता है। जो यह दर्शाता है कि पूजा सफल रही और माता रानी की कृपा प्राप्त हुई। मां शैलपुत्री की पूजा से होती है शुरुआत Navratri Puja Vidhi And Shubh Muhurt: कलश स्थापना के बाद नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। वे पर्वतराज हिमालय की पुत्री हैं और शक्ति का मूल रूप मानी जाती हैं। Post Views: 73 Please Share With Your Friends Also Post navigation Shardiya Navratri 2025: कल है शारदीय नवरात्रि का पहला दिन, इस विधि से करें मां शैलपुत्री की पूजा; जान लें कलश स्थापना और पूजा का शुभ मुहूर्त… Dussehra 2025: किस दिन मनाया जाएगा दशहरा? एक क्लिक में नोट करें मुहूर्त और योग