शिक्षा विभाग में मेडिकल बिल घोटाला: शिक्षक नेता और पत्नी पर जल्द दर्ज होगी FIR, मृत साला और पत्नी के नाम पर लाखों रुपये निकाले

बिलासपुर। बिलासपुर के बिल्हा ब्लॉक में शिक्षा विभाग के भीतर फर्जी मेडिकल बिल का बड़ा मामला उजागर हुआ है। इस मामले में शिक्षक नेता और सीएसी साधेलाल पटेल पर गंभीर आरोप लगे हैं कि उन्होंने अपनी पत्नी प्रधान पाठिका राजकुमारी पटेल के साथ मिलकर फर्जी चिकित्सा प्रतिपूर्ति देयक (मेडिकल बिल) बनाकर लाखों रुपये का गबन किया।

घटना तब सामने आई जब विभागीय जांच में पाया गया कि दोनों ने मृत साले के नाम पर मेडिकल बिल लगाकर राशि आहरित की। इसके अलावा, एक अन्य शिक्षक के वास्तविक मेडिकल बिल में कांट-छांट कर राशि को कई गुना बढ़ाकर पेश किया गया। जांच रिपोर्ट में यह स्पष्ट हुआ कि इन फर्जी बिलों के आधार पर बड़ी रकम का भुगतान कराया गया था।

कैसे हुआ फर्जीवाड़ा:
जानकारी के अनुसार, साधेलाल पटेल ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए फर्जी बिल तैयार करवाए और हस्ताक्षर करवा कर उन्हें विभागीय भुगतान प्रक्रिया में शामिल किया। उनकी पत्नी, राजकुमारी पटेल, जो कि शासकीय प्राथमिक शाला दैहानपारा (बैमा) में प्रधान पाठिका हैं, ने भी इस फर्जीवाड़े में सक्रिय भूमिका निभाई।जांच में सामने आया कि दोनों ने संयुक्त रूप से विभागीय धन का कई लाख रुपये गबन किया। यह भी पाया गया कि साधेलाल पटेल के खिलाफ पहले भी वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लग चुके हैं।

पहले ही किया जा चुका है सस्पेंड
मामले की गंभीरता को देखते हुए संयुक्त संचालक (जेडी) ने सबसे पहले सीएसी साधेलाल पटेल को निलंबित किया। इसके बाद प्रधान पाठिका राजकुमारी पटेल को भी निलंबन का आदेश जारी किया गया।साथ ही, जेडी कार्यालय ने आदेश दिया कि दोनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाए।

इस आदेश के बाद ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (बीईओ) बिल्हा ने कोतवाली थाने को लिखित में आवेदन देकर दोनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का अनुरोध किया है। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और बीईओ से मेडिकल बिल से संबंधित सभी मूल दस्तावेज (ओरिजनल डॉक्यूमेंट) उपलब्ध कराने को कहा है।सूत्रों के अनुसार, पुलिस को अब ये दस्तावेज सौंपे जा रहे हैं और जैसे ही जांच दस्तावेज पूरे होंगे, शिक्षक नेता साधेलाल पटेल और उनकी पत्नी राजकुमारी पटेल पर आपराधिक मामला (FIR) दर्ज किया जाएगा।

शिक्षा विभाग कटघरे में
यह मामला शिक्षा विभाग की वित्तीय पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठाता है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि फर्जी बिल प्रस्तुत करने और सत्यापन प्रक्रिया में गड़बड़ी के कारण इस तरह के भ्रष्टाचार को रोकने के लिए अब डिजिटल वेरिफिकेशन सिस्टम लागू करने की आवश्यकता है।स्थानीय शिक्षकों ने भी मांग की है कि ऐसे मामलों में त्वरित न्यायिक जांच हो, ताकि विभाग की साख बहाल हो सके और भविष्य में कोई अधिकारी या कर्मचारी इस तरह का फर्जीवाड़ा न कर सके।

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By Chhattisgarh Kranti

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