Hanuman  janmotsav 2026 : सनातन धर्म में संकटमोचन हनुमान की आराधना के लिए आदि शंकराचार्य द्वारा रचित “श्री हनुमत् पञ्चरत्नम्” (Shri Hanumat Pancharatnam) का पाठ विशेष फलदायी माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो भक्त नियमबद्ध होकर इन पांच रत्नों रूपी श्लोकों का गान करते हैं, उनके जीवन से भय, मानसिक अशांति और कार्य में आने वाली बाधाएं तत्काल समाप्त हो जाती हैं। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, मंगलवार और शनिवार के दिन इस पाठ का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। 

शास्त्रोक्त विधि: ऐसे करें हनुमत् पञ्चरत्नम् का पाठ

पूजा की प्रभावशीलता उसकी शुद्धता और विधि पर निर्भर करती है। भक्तों को सलाह दी जाती है कि वे सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नानादि से निवृत्त हों। इसके पश्चात लाल रंग के स्वच्छ वस्त्र धारण करना अनिवार्य है, क्योंकि लाल रंग पवनपुत्र को अत्यंत प्रिय है।

  • आसन और दिशा: कुश या ऊन के आसन पर पूर्व या दक्षिण दिशा की ओर मुख करके बैठें।
  • दीप-प्रज्वलन: हनुमान जी की प्रतिमा या चित्र के समक्ष शुद्ध घी का दीपक जलाएं।
  • भोग एवं अर्पण: लाल पुष्प (विशेषकर गुड़हल या गुलाब) अर्पित करें। भोग में गुड़, चने या बेसन के लड्डू चढ़ाना शुभ होता है।
  • संकल्प: पाठ शुरू करने से पहले हाथ में जल लेकर अपनी मनोकामना का स्मरण करें।

साधना के नियम और आवृत्ति

श्री हनुमत् पञ्चरत्नम् के पाठ की संख्या श्रद्धा और समय के अनुसार तय की जा सकती है। सामान्यतः इसे 1, 3, 7 या 11 बार पढ़ना उत्तम माना जाता है। पाठ के दौरान स्वर स्पष्ट और मन एकाग्र होना चाहिए। अनुष्ठान की पूर्णता हनुमान जी की आरती और क्षमा प्रार्थना के साथ होती है।

श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण लाभ

इस स्तोत्र में हनुमान जी की वीरता, बुद्धि और राम-भक्ति का वर्णन है। इसके नियमित पाठ से साधकों को निम्नलिखित लाभ प्राप्त होते हैं:

  • अज्ञात भय और शत्रुओं से मुक्ति मिलती है।
  • व्यापार और नौकरी में आ रही बाधाएं दूर होती हैं।
  • घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और क्लेश समाप्त होते हैं।
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By Chhattisgarh Kranti

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