रायपुर : छत्तीसगढ़ की माटी से निकला एक प्राकृतिक रत्न, जिसे स्थानीय लोग ‘गंगा इमली’ या ‘जंगली इमली’ के नाम से पुकारते हैं, अब स्वास्थ्य के लिए वरदान बनकर उभर रहा है। इस मौसम में ग्रामीण बाजारों में ढेर सारी जंगली इमली अपनी खट्टी-मीठी खुशबू बिखेर रही है। अगर आपने अभी तक इसका स्वाद नहीं चखा, तो यह प्रकृति का अनमोल तोहफा आपके स्वास्थ्य को नई दिशा दे सकता है। आइए, जानते हैं कैसे यह छोटा-सा फल बड़े-बड़े रोगों से जंग जीतने में मदद करता है।

पाचन का साथी, अपच का दुश्मन – जंगली इमली में मौजूद प्राकृतिक एंजाइम पाचन तंत्र को चुस्त-दुरुस्त रखते हैं। खाने के बाद गैस, भारीपन या अपच की शिकायत हो, तो एक मुट्ठी गंगा इमली का सेवन तुरंत राहत देता है। ग्रामीण बुजुर्ग इसे ‘पेट का जादूगर’ कहकर पुकारते हैं।

रोगों से लड़ने की ताकत बढ़ाए – विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर जंगली इमली शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करती है। सर्दी-खांसी से लेकर वायरल इन्फेक्शन तक, यह फल आपके शरीर को ढाल बनाकर सुरक्षा देता है। स्थानीय वैद्य इसे ‘प्रकृति का इम्यून बूस्टर’ मानते हैं।

शरीर का डिटॉक्स, त्वचा में निखार – गंगा इमली का नियमित सेवन शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने में मदद करता है। यह रक्त को शुद्ध करता है, जिससे मुहांसे, दाग-धब्बे और त्वचा रोगों में कमी आती है। गांव की महिलाएं इसे ‘खून साफ करने की दवा’ के रूप में इस्तेमाल करती हैं।

शुगर और कोलेस्ट्रॉल पर लगाम – आधुनिक शोध भी जंगली इमली के गुणों की तारीफ कर रहे हैं। कुछ अध्ययनों के अनुसार, यह रक्त शर्करा और खराब कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित करने में सहायक है। डायबिटीज और हृदय रोगों से जूझ रहे लोगों के लिए यह प्रकृति का सस्ता और असरदार उपाय हो सकता है।

खट्टा स्वाद, सेहत का खजाना – छत्तीसगढ़ के जंगलों और ग्रामीण अंचलों में आसानी से मिलने वाली जंगली इमली न सिर्फ स्वाद में लाजवाब है, बल्कि यह औषधीय गुणों का भंडार भी है। बाजार में इसकी कीमत भी ज्यादा नहीं होती, जिससे हर कोई इसे आसानी से खरीद सकता है। स्थानीय लोग इसे चटनी, अचार या सीधे खाने के रूप में इस्तेमाल करते हैं।

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By Chhattisgarh Kranti

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