अबूझमाड़ मुठभेड़ में 27 नक्सली ढेर, 2010 और 2017 में लूटी गई AK-47 सहित भारी हथियार बरामद…

नारायणपुर : छत्तीसगढ़ के अबूझमाड़ के घने जंगलों में डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड (DRG) और सुरक्षा बलों ने नक्सलियों के सबसे मजबूत गढ़ पर अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई को अंजाम देकर इतिहास रच दिया है। 21 मई को शुरू हुए इस भीषण मुठभेड़ में 27 नक्सलियों को मार गिराया गया, जिनमें 10 करोड़ रुपये के इनामी और सीपीआई (माओवादी) के महासचिव नंबाला केशव राव उर्फ बसव राजू भी शामिल हैं।

ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट के तहत चले इस अभियान में 2010 के ताड़मेटला (दंतेवाड़ा), 2010 के गवादि (नारायणपुर), और 2017 के बुरकापाल (सुकमा) हमलों में लूटी गई AK-47 राइफलें सहित भारी मात्रा में अत्याधुनिक हथियार और गोला-बारूद बरामद किए गए। मुठभेड़ के बाद तलाशी अभियान में सुरक्षा बलों ने 3 AK-47 राइफलें, 4 SLR, 6 INSAS राइफलें, 1 कार्बाइन, 6 .303 राइफलें, 1 BGL लॉन्चर, 2 रॉकेट लॉन्चर, 2 बारह बोर बंदूकें, 1 पिस्तौल, 2 भरमार बंदूकें और भारी मात्रा में गोला-बारूद बरामद किया।

इनमें से कई हथियार उन हमलों से लूटे गए थे, जिनमें नक्सलियों ने सुरक्षाबलों पर क्रूर हमले किए थे। मारे गए नक्सलियों में बसव राजू के अलावा 1 पोलित ब्यूरो सदस्य, 1 दक्षिण सब जोनल ब्यूरो प्रमुख, 4 क्षेत्रीय सचिव, और पीएलजीए कंपनी नंबर-7 के 18 सदस्य शामिल हैं, जिन पर छत्तीसगढ़ सरकार ने कुल 3.33 करोड़ रुपये का इनाम घोषित किया था। बसव राजू, जो 2018 से नक्सली संगठन का नेतृत्व कर रहा था, कई बड़े हमलों का मास्टरमाइंड था।

2010 में ताड़मेटला नरसंहार में 76 CRPF जवान, 2013 में झीरम घाटी हमले में 27 लोग, और 2018 में आंध्र प्रदेश के विधायक किदारी सर्वेश्वर राव की हत्या जैसे जघन्य अपराधों में उसकी संलिप्तता थी। वह नाबालिगों को जबरन भर्ती करने और आदिवासियों के खिलाफ हिंसा के लिए भी कुख्यात था। उसकी इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि और LTTE से प्रशिक्षण ने उसे विस्फोटकों और गुरिल्ला युद्ध में विशेषज्ञ बना दिया था।

मुठभेड़ में DRG के दो जवान, खोटलूराम कोर्राम और रमेश हेमला, शहीद हो गए। उनके बलिदान को सम्मान देते हुए नारायणपुर में अंतिम विदाई दी गई। 27 शवों में से 20 की पहचान कर परिजनों को सौंप दिया गया, जबकि बसव राजू सहित 7 शवों का अंतिम संस्कार कार्यपालक मजिस्ट्रेट के आदेश पर विधिसम्मत तरीके से किया गया। माओवादी कैडर कोसी उर्फ हुंगी के परिजनों ने नारायणपुर में ही शव का अंतिम संस्कार करने की अनुमति मांगी।

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By Chhattisgarh Kranti

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