रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय बेंगलुरु में आयोजित इन्वेस्टर्स कनेक्ट कार्यक्रम से आज रायपुर लौटे. रायपुर एयरपोर्ट पर उन्होंने पत्रकारों से चर्चा करते हुए महादेव सट्टा एप मामले में CBI रेड और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बयान पर पलटवार किया. सीएम साय ने कहा कि भूपेश बघेल केu पास दूसरा बोलने के लिए कोई रास्ता नहीं है. सीबीआई के द्वारा महादेव सट्टा एप पर यह जांच हो रही है. सबको मालूम है किस तरह से हमारे छत्तीसगढ़ के युवाओं को सट्टे की लत लगा दी गई थी. अब मामले में जांच सीबीआई कर रही है. इसके साथ ही सीएम साय ने भूपेश बघेल के बयान को लेकर कहा कि उनके पास बोलने के लिए कुछ नहीं है तो कुछ भी बोलते हैं. इसमें चाहे कोई भी हो दोषीदार बख्शे नहीं जाएंगे. इसमें भाजपा और कांग्रेस के करीबी होने का कोई सवाल नहीं है. जो भी लिंक पूरे प्रकरण से जुड़ा होगा, उन सभी के ऊपर कार्रवाई होगी. इन्वेस्टर्स कनेक्ट कार्यक्रम का सफल आयोजन, 3700 करोड़ के निवेश प्रस्ताव मिले – सीएम सायबैंगलुरु इन्वेस्टर्स मीट कार्यक्रम को लेकर सीएम ने जानकारी देते हुए कहा कि इन्वेस्टर्स कनेक्ट का कार्यक्रम बहुत अच्छे से संपन्न हुआ. छत्तीसगढ़ की नई उद्योग नीति की निवेशकों को जानकारी दी गई. इससे उद्यमी और निवेशक काफी आकर्षित हुए हैं. कल 3700 करोड़ रुपये का निवेश का प्रस्ताव सौंपा गया है. कुछ कंपनियों से एमओयू हुआ है. इंजीनियरिंग और आईटी के क्षेत्र में यहां पर उद्योग लगेंगे. इस तरह से बहुत अच्छा हमारा यह इन्वेस्टर्स कनेक्ट का कार्यक्रम रहा है. इसके पहले भी हमने दिल्ली और मुंबई में इस तरह का कार्यक्रम किया था, जिसमें काफी अच्छा रुझान आया है. उद्योगपति बहुत इंटरेस्ट ले रहे हैं. सीएम साय ने बताया कि नई उद्योग नीति लॉन्च करने के बाद करीब 4 लाख 40 हजार करोड़ के प्रस्ताव मिले हैं. यह हमारी नई उद्योग नीति का ही असर है. 3700 करोड़ के जो निवेश के प्रस्ताव दिए हैं, उनमें ग्रीन एनर्जी और फ्रूट प्रोसेसिंग के प्रस्ताव हैं. Post Views: 266 Please Share With Your Friends Also Post navigation मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से की मुलाकात…मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री को सौंपा बस्तर के विकास का रोडमैप संजय श्रीवास्तव ने कांग्रेस के प्रेस कांफ्रेंस पर किया पलटवार….नीयत साफ थी तो मुख्यमंत्री रहते हुए ही बघेल ने महादेव सट्टा मामला सीबीआई को क्यो नही सौंपा