रायपुर : छत्तीसगढ़ की साय सरकार ने निगम मंडल में नियुक्तियों की बहुप्रतिक्षीत सूची बुधवार की रात भले ही जारी कर दी है, लेकिन सरकार की इस सूची में पद से वंचित रह गये बड़े नेताओं के साथ ही जिन्हे सम्मानजनक पद नही मिला उन नेताओं में असंतोष बढ़ने लगा है। लिस्ट के जारी होते ही छत्तीसगढ़ राज्य केश शिल्पी कल्याण बोर्ड के उपाध्यक्ष बने गौरीशंकर श्रीवास ने इस नियुक्ति को ठुकराते हुए नाराजगी व्यक्त की है। उन्होने एक्स पर लिखा कि….“पार्टी ने इतनी बड़ी जिम्मेदारी दी है कि जिसे उठाने में मेरे कंधे असमर्थ हैं! इसलिए पद स्वीकार नहीं! संगठन के कार्यकर्ता के रूप में मैं ठीक हूँ। धन्यवाद! गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में सत्ता परिवर्तन के बाद से ही पार्टी के बड़े नेताओें के साथ ही सालों से पार्टी के लिए ऐढ़ी-चोटी लगाने वाले नेताओं को निगम मंडल में नियुक्ति की उम्मींदे थी। लेकिन प्रदेश में साय सरकार के करीब डेढ़ साल का कार्यकाल बीत जाने के बाद भी निगम मंडल में नियुक्तियां नही हो सकी थी। ऐसे में नगरीय निकाय चुनाव के बाद निगम मंडल में नियुक्तियों की लिस्ट जारी होने की उम्मींदे बढ़ गयी थी। वहीं पार्टी के बड़े नेताओं के साथ ही ऐसे नेता जिन्हे पिछले चुनाव में टिकट से वंचित रखा गया, उन्हे निगम मंडल में बड़ी जवाबदारी मिलने की उम्मींदे थी। इन सारे कयासों के बीच बुधवार की रात सरकार की तरफ से 36 निगम मंडल के अध्यक्ष-उपाध्यक्षों के नाम तय कर सूची जारी किये गये। इस सूची के जारी होते ही एक तरफ उन नेताओं के चेहरे खिल गये, जिन्हे अध्यक्ष पद की कुर्सी मिल गयी। वहीं दूसरी तरफ उन नेताओं के अरमान पर पानी फिर गये जिन्होने पिछले डेढ़ साल से निगम मंडल में लाल बत्ती के सपने संजोए बैठे थे। जारी सूची को लेकर जिस तरह से बड़े नेता असंतोष व्यक्त कर रहे है, उससे ऐसा ही लगता है, जैसे सरकार ने उन्हे उनके कद के मुताबिक पद नही दिया या फिर पद के काबिल ही नही समझा। ऐसे में बीजेपी के उन नेताओ के बीच अब असंतोष बढ़ने लगा है,जिन्हे निगम मंडल में कुर्सी मिलने की बड़ी उम्मींदे थी। गौरीशंकर श्रीवास ने उपाध्यक्ष के पद को ठुकराया सरकार द्वारा जारी निगम मंडल की सूची में भाजपा के वरिष्ठ नेता और प्रवक्ता गौरीशंकर श्रीवास को छत्तीसगढ़ राज्य केश शिल्पी कल्याण बोर्ड का उपाध्यक्ष बनाया गया है, जबकि अध्यक्ष का पद मोना सेन को दिया गया। लेकिन गौरीशंकर श्रीवास को सरकार के तरफ से मिली ये नियुक्ति रास नही आयी। लिहाजा उन्होने सोशल मीडिया प्लेटफार्मस में उपाध्यक्ष के पद पर मिली नियुक्ति को ठुकराते हुए अपनी नाराजगी व्यक्त की है। उन्होने X पर लिखा….“पार्टी ने इतनी बड़ी जिम्मेदारी दी है कि जिसे उठाने में मेरे कंधे असमर्थ हैं! इसलिए पद स्वीकार नहीं! संगठन के कार्यकर्ता के रूप में मैं ठीक हूँ।” धन्यवाद! आपको बता दे सरकार द्वारा जारी निगम-मंडल नियुक्तियों की बहुप्रतीक्षित सूची में भूपेंद्र सवन्नी को छोड़कर सभी नए चेहरों को जगह दी गई है। पार्टी ने पिछले चुनाव में टिकट के दावेदार रहे नेताओं को पद देकर जहां उनकी नाराजगी दूर करने के साथ ही सत्ता में संतुलन बनाने का प्रयास किया है। वहीं दूसरी तरफ इस बहुप्रतीक्षित सूची के सामने आते ही कई बड़े नेताओं में असंतोष बढ़ने लगा है। बीजेपी के प्रवक्ता गौरीशंकर अग्रवाल ने जिस तरह से सरकार के फैसले पर अपना असंतोष जाहिर किया है, उससे उम्मींद जतायी जा रही है कि आने वाले वक्त में दूसरे अन्य बड़े नेताओं की नाराजगी का सामना पार्टी को करना पड़ सकता है। Post Views: 212 Please Share With Your Friends Also Post navigation सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने उठाया लोकसभा में छत्तीसगढ़ की खदानों का मुद्दा, रिक्लेमेशन की मांग बस्तर और रायगढ़ के अध्यक्षों ने खोली गुटबाज़ी की पोल राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे के सामने रखी ज़मीनी हकीकत