रायपुर। छत्तीसगढ़ में शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता, सेवा सुरक्षा, वरिष्ठता, पदोन्नति और वेतन विसंगति समेत विभिन्न मांगों को लेकर शिक्षक साझा मंच ने शनिवार को प्रदेशव्यापी शक्ति प्रदर्शन किया। मंच के आह्वान पर प्रदेश के 146 विकासखंडों में एक साथ रैली, धरना और ज्ञापन कार्यक्रम आयोजित किया गया। शिक्षकों ने विकासखंड मुख्यालयों में रैली निकालकर मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा और लंबित मांगों पर तत्काल निर्णय लेने की मांग की।

इस आंदोलन की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि शिक्षकों ने स्कूल बंद किए बिना और विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित किए बिना अपनी आवाज शासन तक पहुंचाई। मंच ने इसे शिक्षक एकता और जिम्मेदारी का बड़ा उदाहरण बताया।

शिक्षक साझा मंच के अनुसार प्रदेशभर के शिक्षकों ने अपने-अपने विकासखंडों में एकजुट होकर रैली निकाली। इस दौरान TET की अनिवार्यता से प्रभावित शिक्षकों को सेवा सुरक्षा, वरिष्ठता के आधार पर पदोन्नति, वेतन विसंगति दूर करने और पूर्व सेवा की गणना समेत विभिन्न मांगों को लेकर नारेबाजी की गई।

बस्तर, जशपुर सहित कई जिलों में बड़ी संख्या में शिक्षक रैली में शामिल हुए। वहीं बेरला और बेमेतरा में बाइक रैली निकालकर शिक्षकों ने अपनी मांगों को बुलंद किया। कई स्थानों पर बारिश के बावजूद शिक्षक कार्यक्रम में डटे रहे।

रविंद्र राठौर ने सरकार को दी दो टूक चेतावनी

सहायक शिक्षक समग्र फेडरेशन के अध्यक्ष और शिक्षक साझा मंच से जुड़े रविंद्र राठौर ने विकासखंड स्तर पर शिक्षकों के प्रदर्शन को सराहनीय बताते हुए सरकार से तत्काल निर्णय लेने की मांग की है।

रविंद्र राठौर ने कहा—

“आज विकासखंड स्तर पर कार्यक्रम में शिक्षकों ने जिस तरह का जोश और एकजुटता दिखाई, वह काफी सराहनीय है। शिक्षकों ने यह साबित कर दिया है कि वे अपनी सेवा सुरक्षा और अधिकारों की लड़ाई पूरी मजबूती से लड़ने के लिए तैयार हैं। हम सरकार से मांग करते हैं कि 29 अगस्त को होने वाले दूसरे चरण के जिला स्तरीय आंदोलन से पहले हमारी मांगों पर त्वरित निर्णय लिया जाए।”

उन्होंने आगे कहा कि यदि सरकार ने समय रहते शिक्षकों की मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन और तेज होगा।

“यदि 29 अगस्त से पहले सरकार हमारी मांगों पर निर्णय नहीं लेती है, तो 29 अगस्त के जिला स्तरीय आंदोलन और 9 सितंबर की न्याय पदयात्रा में शिक्षकों का तीखा प्रदर्शन देखने को मिलेगा। सरकार को अब शिक्षकों की आवाज को गंभीरता से लेना होगा।”

स्कूल भी चला, आंदोलन भी हुआ

शिक्षक साझा मंच ने कहा कि शिक्षकों ने इस आंदोलन के जरिए यह स्पष्ट संदेश दिया है कि वे अपनी समस्याओं और अधिकारों को लेकर संघर्षरत हैं, लेकिन विद्यार्थियों की पढ़ाई और विद्यालय की जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटेंगे।

मंच के पदाधिकारियों का कहना है कि आंदोलन के कारण स्कूल बंद होने और पढ़ाई प्रभावित होने का आरोप लगाया जाता रहा है, लेकिन 22 अगस्त के कार्यक्रम ने इसका जवाब दिया है। शिक्षकों ने विद्यालयीन कार्य प्रभावित किए बिना विकासखंड स्तर पर अपनी मांगों को शासन तक पहुंचाया।

प्रदीप पाण्डेय बोले- यह व्यवस्था के खिलाफ नहीं, न्याय के लिए संघर्ष

शिक्षक साझा मंच के संचालक प्रदीप पाण्डेय ने कहा कि शिक्षकों का आंदोलन किसी व्यवस्था को बाधित करने के लिए नहीं है। यह शिक्षकों की सेवा सुरक्षा और न्यायपूर्ण व्यवस्था के लिए संघर्ष है। 146 विकासखंडों में एक साथ कार्यक्रम आयोजित होना प्रदेश में शिक्षक एकता और संगठन की ताकत को दर्शाता है।

अब 29 अगस्त पर टिकी नजर, 9 सितंबर को न्याय पदयात्रा

शिक्षक साझा मंच ने साफ कर दिया है कि 22 अगस्त का विकासखंड स्तरीय आंदोलन आंदोलन का अंतिम चरण नहीं है। मंच की अगली बड़ी गतिविधि 29 अगस्त को जिला स्तरीय आंदोलन के रूप में होगी। इसके बाद 9 सितंबर को न्याय पदयात्रा प्रस्तावित है।

शिक्षकों का कहना है कि सरकार के पास अब मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेने का अवसर है। यदि समय रहते समाधान नहीं निकाला गया तो आने वाले चरणों में आंदोलन को और व्यापक एवं तीखा किया जाएगा।

रविंद्र राठौर के बयान से साफ है कि शिक्षक साझा मंच अब सरकार से सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि 29 अगस्त से पहले ठोस निर्णय की उम्मीद कर रहा है।

प्रदेशभर के शिक्षक नेताओं और पदाधिकारियों ने आंदोलन को दिया समर्थन

शिक्षक साझा मंच के इस प्रदेशव्यापी आंदोलन में विभिन्न शिक्षक संगठनों के पदाधिकारियों और प्रतिनिधियों ने सक्रिय भूमिका निभाई। आंदोलन को सफल बनाने और शिक्षकों की सेवा सुरक्षा, वरिष्ठता एवं अन्य मांगों के समर्थन में रविन्द्र राठौर, राजू टंडन, देवेंद्र हरमुख, मनीष मिश्रा, शेषनाथ पाण्डेय, बसंत कौशिक, कौशल अवस्थी, अश्वनी कुर्रे, सुरजीत सिंह चौहान, सिराज बक्श, पुरुषोत्तम झाड़ी, आदित्य गौरव साहू, टिकेश्वर भोई, तरुण वैष्णव, गोकुल जायसवाल, विजेंद्र चौहान, रोशन सहारे, नोहर चंद्रा, राजेंद्र वर्मा, मनीष डडसेना, हुलेश चंद्राकार, उमा पाण्डेय, नेमी सिन्हा, विपिन यादव, रूपिका रानी मरकाम, चंद्रप्रकाश तिवारी, दिलीप लहरें, अशोक धुर्वे, वीरेंद्र यादव, पंकज लहरें, दिनेश नायक, अशोक नाग, राम नरेश अजगल्ले, कोमल साहू, रीता भगत, महेश सेठी, दुर्गा वर्मा, मंजू देवांगन, बुधनी अजय, काशी नाथ बघेल, यशवंत यादव, मनोज कश्यप, सीडी भट्ट, रणजीत बनर्जी, आलोक त्रिवेदी, त्रिपेश चापड़ी, संतोष यादव, केशरी पैकरा, प्रदीप पटेल, आशीष गुप्ता, यशवंत दुबे, अभिजीत तिवारी, हेमकुमार साहू, छबि पटेल, इंद्रजीत शर्मा, बिहारीलाल बेरठ, राजेश मिश्रा, रामकृष्ण साहू, उत्तम बघेल, राजा राम पटेल, धनंजय सिंह, नान्हू राजवाड़े, रविन्द्र गिरी और दीनबंधु वैष्णव ने आंदोलन में सहभागिता और समर्थन दिया।

इन सभी पदाधिकारियों और शिक्षक प्रतिनिधियों ने एक स्वर में कहा कि शिक्षकों की सेवा सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर सरकार को तत्काल सकारात्मक निर्णय लेना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर समय रहते निर्णय नहीं लिया गया तो आगामी 29 अगस्त के जिला स्तरीय आंदोलन और 9 सितंबर की न्याय पदयात्रा में शिक्षक और अधिक संगठित व मजबूती से अपनी आवाज बुलंद करेंगे।

Please Share With Your Friends Also

By Chhattisgarh Kranti

हमारी कोशिश इस वेबसाइट के माध्यम से आप तक राजनीति, खेल, मनोरंजन, जॉब, व्यापार देश विदेश इत्यादि की ताजा और नियमित खबरें आप तक पहुंच सकें। नियमित खबरों के लिए जुड़े रहिए हमारे साथ। जय जोहार ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!