गुजरात। वर्ष 2008 के चर्चित अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट मामले में गुजरात हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए स्पेशल कोर्ट के निर्णय को पूरी तरह बरकरार रखा है। जस्टिस ए.वाई. कोगजे और जस्टिस समीर दवे की खंडपीठ ने सभी दोषियों की अपील खारिज कर दी। इसके साथ ही 38 दोषियों को दी गई फांसी और 11 दोषियों की उम्रकैद की सजा यथावत रहेगी। 26 जुलाई 2008 को अहमदाबाद में महज 70 मिनट के भीतर 21 स्थानों पर सिलसिलेवार बम धमाके हुए थे। इन हमलों में 56 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 200 से अधिक लोग घायल हुए थे। यह देश के सबसे बड़े आतंकी हमलों में से एक माना जाता है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को मृतकों के परिजनों को 10-10 लाख रुपये और 200 से अधिक घायलों को 1-1 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश भी दिया है। लॉकडाउन में भी जारी रही सुनवाई इस मामले की जांच और सुनवाई करीब 12 वर्षों तक चली। कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान भी अदालत में सुनवाई जारी रही। वर्ष 2009 में लगभग 35 मामलों को एक साथ जोड़कर विशेष ट्रायल शुरू किया गया था। इस मुकदमे में 1,100 से अधिक गवाहों के बयान दर्ज किए गए, 6,000 से ज्यादा दस्तावेज पेश किए गए और 3.47 लाख से अधिक पन्नों की 547 चार्जशीट अदालत में दाखिल की गईं। इंडियन मुजाहिदीन और SIMI पर लगा था आरोप जांच एजेंसियों के अनुसार, प्रतिबंधित आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन (IM) और स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (SIMI) से जुड़े आरोपियों ने इन धमाकों को अंजाम दिया था। पुलिस का दावा था कि 2002 के गोधरा कांड के बाद हुए सांप्रदायिक दंगों के प्रतिशोध की मंशा से इस आतंकी साजिश को अंजाम दिया गया। Post Views: 23 Please Share With Your Friends Also Post navigation छत्तीसगढ़ में खत्म हो सकता है मदरसा बोर्ड; वक्फ बोर्ड ने CM साय को लिखा पत्र