नई दिल्ली। संसद का सत्र जारी है और देश के कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चाओं का दौर चल रहा है। इसी बीच, राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने एक बेहद जरूरी और संवेदनशील मुद्दे को उठाकर सबको सोचने पर मजबूर कर दिया है। उन्होंने संसद में के विषय को प्रमुखता से उठाते हुए देश की 35 करोड़ से अधिक महिलाओं और लड़कियों की बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं और शिक्षा के अधिकार की वकालत की है।

सैनिटरी पैड को आज भी अखबार में लपेटा जाता है

सांसद चड्ढा ने संसद के पटल पर समाज में व्याप्त दोहरे मानदंडों पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि माहवारी एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, लेकिन इसे लेकर फैला कलंक बिल्कुल भी प्राकृतिक नहीं है। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि हम ऐसे देश में रहते हैं जहाँ शराब और सिगरेट तो खुलेआम बिकती हैं, लेकिन सैनिटरी पैड को आज भी अखबार में इस तरह लपेटा जाता है मानो उसे छिपाना कोई अनिवार्यता हो। सांसद ने तर्क दिया कि यदि कोई लड़की पैड, पानी या निजता की कमी के कारण स्कूल नहीं जा पाती, तो यह उसकी व्यक्तिगत समस्या नहीं बल्कि हम सबकी सामूहिक विफलता है। उन्होंने इसे स्वास्थ्य, शिक्षा और समानता का मुद्दा बताते हुए स्पष्ट किया कि माहवारी स्वच्छता न तो कोई दान है और न ही कोई एहसान।

हम गर्व से कह सकेंगे कि हमारा समाज वास्तव में आगे बढ़ गया है

चड्ढा ने संसद में यह चिंता जताई कि भारत की 35 करोड़ से अधिक महिलाएं और लड़कियां आज भी इस बुनियादी विषय पर डर, शर्म और चुप्पी का सामना कर रही है। उन्होंने अपनी बात समाप्त करते हुए कहा कि कोई भी राष्ट्र तब तक वास्तव में प्रगतिशील नहीं कहला सकता, जब तक उसकी बेटियां गरिमा के साथ जीवन न जी सकें और बिना किसी कलंक के अपनी स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों पर खुलकर बात न कर सकें। चड्ढा के अनुसार, जिस दिन भारत की हर लड़की बिना झिझक स्कूल जा सकेगी, उसी दिन हम गर्व से कह सकेंगे कि हमारा समाज वास्तव में आगे बढ़ गया है।

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By Chhattisgarh Kranti

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