धरमजयगढ़ से लीलाम्बर यादव की रिपोर्ट

बीजापुर में स्वतंत्र पत्रकारिता करने वाले युवा पत्रकार मुकेश चंद्राकर की हत्या के विरोध में पत्रकारों ने मुख्यमंत्री के नाम तहसीलदार धरमजयगढ़ को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में हत्यारों पर सख्त कार्रवाई की मांग की गई है।

पत्रकारों ने कहा कि छत्तीसगढ़ में पत्रकारों को स्वतंत्र रूप से अपनी बात रखने में गंभीर मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासनिक दबाव और ठेकेदारों, भू-माफिया, शराब माफिया समेत अन्य असामाजिक तत्वों द्वारा उनकी आवाज को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। ऐसे पत्रकार, जो सच्चाई को उजागर करते हैं, उन्हें धमकियां मिलती हैं और यहां तक कि जानलेवा हमलों का सामना करना पड़ता है।

ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि पत्रकार मुकेश चंद्राकर की हत्या का एकमात्र कारण यह था कि वह सच्चाई को उजागर कर अपनी बात बेखौफ रख रहे थे। उनकी हत्या से छत्तीसगढ़ की पत्रकारिता के बुरे दौर की तस्वीर सामने आती है।

पत्रकार सुरक्षा कानून लागू करने की मांग

ज्ञापन में निम्नलिखित मांगें की गईं:

  1. हत्यारों पर सख्त कार्रवाई: हत्या में शामिल अपराधियों की संपत्ति जब्त कर पत्रकार के परिवार को ₹1 करोड़ की आर्थिक सहायता दी जाए।
  2. शहीद का दर्जा: दिवंगत पत्रकार मुकेश चंद्राकर को शहीद का दर्जा दिया जाए।
  3. पुलिस प्रशासन की जांच: बीजापुर के पुलिस अधीक्षक द्वारा ठेकेदारी के रैकेट का संचालन और मामले को दबाने के आरोपों की निष्पक्ष जांच हो।
  4. सुरक्षा कानून: प्रदेश में अविलंब पत्रकार सुरक्षा कानून लागू किया जाए ताकि पत्रकार स्वतंत्रता और सुरक्षा के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन कर सकें।

ज्ञापन सौंपने वाले दल का नेतृत्व अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा समिति के ग्रामीण जिलाध्यक्ष नारायण बाईन ने किया। उनके साथ भाजपा मंडल अध्यक्ष भरत लाल साहू, ऋषभ तिवारी, शेख आलम, राजू यादव, और कुमारी उमा यादव शामिल रहे।

निष्पक्ष जांच की आवश्यकता

स्थानीय सूत्रों का कहना है कि संदेही हत्यारों को ठेकेदारों के नाम पर पुलिस अधीक्षक ने बचाने का प्रयास किया। परिजनों और पत्रकारों को तीन दिनों तक वास्तविकता से दूर रखा गया और आरोपियों को सुरक्षित भागने का मौका दिया गया। ज्ञापन में इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।

पत्रकार मुकेश चंद्राकर की हत्या ने एक बार फिर छत्तीसगढ़ में पत्रकारों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पत्रकारों का कहना है कि यदि मांगों को जल्द नहीं माना गया, तो आंदोलन के बड़े कदम उठाए जाएंगे।

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By Chhattisgarh Kranti

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