स्कूल बसों की जांच में 93 बसें अनफिट, विभाग ने दिया 3 दिन का अल्टीमेटम
बिलासपुर:- न्यायधानी के बहतराई स्टेडियम में रविवार को सुरक्षा और सेहत का एक बड़ा सरोकार देखने को मिला। राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह के अंतर्गत स्कूल बसों की सघन मैकेनिकल जांच और बस स्टाफ के लिए स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया। इस दौरान स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर कई गंभीर खामियां उजागर हुई हैं। जिले की कुल 233 स्कूल बसों की तकनीकी पड़ताल में करीब 40 प्रतिशत बसें अनफिट पाई गईं, जिन्हें सड़क पर दौड़ाने के लिए असुरक्षित माना गया है। वहीं, दूसरी ओर बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालने वाले चालक और परिचालक खुद भी कई बीमारियों की चपेट में मिले, जिससे परिवहन व्यवस्था और प्रबंधन पर बड़े सवाल खड़े हो गए है।
परिवहन विभाग और पुलिस प्रशासन द्वारा संयुक्त रूप से की गई इस कार्रवाई में बसों के तकनीकी मापदंडों की बारीकी से जांच की गई। आंकड़ों के मुताबिक, 233 बसों में से केवल 140 बसें ही तय मानकों पर खरी उतरीं, जबकि 93 बसों में गंभीर तकनीकी त्रुटियां पाई गईं। जांच के दौरान यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि 18 बसें बिना प्रदूषण प्रमाणपत्र के चल रही थीं, जबकि 37 बसों में आग से बचाव के लिए अग्निशमन यंत्र ही उपलब्ध नहीं थे। इतना ही नहीं, सुरक्षा के लिहाज से अनिवार्य सीसीटीवी कैमरे, सुरक्षा जाली और फर्स्ट एड बॉक्स जैसी बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव दिखा। प्रशासन ने इन सभी कमियों को बेहद गंभीरता से लेते हुए बस संचालकों को सख्त हिदायत दी है कि तीन दिनों के भीतर सभी तकनीकी खामियों को दुरुस्त किया जाए। निर्धारित समय में सुधार न होने की स्थिति में वाहनों को ब्लैकलिस्ट करने और परमिट निरस्त करने जैसी कठोर कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
56 बस कर्मचारी मिले गंभीर बीमारियों से ग्रसित
इस अभियान का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू बस ड्राइवरों और कंडक्टर्स की सेहत से जुड़ा रहा। मैकेनिकल जांच के साथ-साथ स्टाफ के लिए नेत्र और सामान्य स्वास्थ्य परीक्षण शिविर लगाया गया, जिसके परिणाम चिंताजनक रहे। परीक्षण में शामिल 233 कर्मचारियों में से 26 शुगर और 21 उच्च रक्तचाप (BP) से पीड़ित पाए गए, वहीं 9 कर्मचारी चर्म रोग से ग्रसित मिले। चिकित्सा विशेषज्ञों ने इन सभी को तत्काल उपचार और नियमित परामर्श की सलाह दी है। अभियान के दौरान स्पष्ट किया गया कि यदि बस संचालक उच्चतम न्यायालय द्वारा निर्धारित मापदंडों की अनदेखी करते हैं, तो उन पर मोटर व्हीकल अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। जो स्कूल अपनी बसों को जांच के लिए निर्धारित स्थल पर नहीं लाए हैं, उनके परिसरों में जाकर आगामी दिनों में औचक निरीक्षण किया जाएगा।