प्रकाशित सूचना में खामियां, ग्रामीणों ने परिसंपत्तियों का पुनः परीक्षण कराने की मांग

परसा ईस्ट एवं केते बासेन कोल परियोजना के लिए जिला सरगुजा (छ.ग.) के उदयपुर स्थित भू-अर्जन अधिकारी कार्यालय ने भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम 2013 की धारा 21(1) के अंतर्गत ग्राम घाटबर्रा के प्रभावितों से दावा-आपत्ति के लिए 11 से 13 दिसंबर तक सुनवाई आयोजित की।

प्रकाशित सूचना में प्रभावित ग्रामीणों से कहा गया कि वे अनुविभागीय अधिकारी (रा.) एवं भू-अर्जन अधिकारी उदयपुर के कार्यालय में स्वयं या अधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से उपस्थित होकर भूमि के स्वत्व, अर्जित क्षेत्रफल, भूमि के प्रकार, निहित अंश, अथवा क्षतिपूर्ति से संबंधित आपत्तियां लिखित में दस्तावेजी प्रमाणों के साथ प्रस्तुत करें। अनुपस्थिति की स्थिति में एकपक्षीय कार्यवाही कर मुआवजा तय करने की बात भी सूचना में लिखी गई।

ग्रामीणों में आक्रोश, परिसंपत्तियों के विवरण में खामियों का आरोप

प्रकाशित सूची में हुई खामियों को लेकर ग्रामीणों में रोष व्याप्त हो गया। 11 दिसंबर को ग्रामीणों ने अनुभागीय कार्यालय पहुंचकर एसडीएम बन सिंह नेताम से मुलाकात की और अपनी समस्याएं सामने रखीं। उन्होंने मांग की कि अधिकारी ग्राम घाटबर्रा में आकर परिसंपत्तियों का पुनः परीक्षण करें। ग्रामीणों की इस मांग पर एसडीएम ने सहमति जताते हुए 12 और 13 दिसंबर को ग्राम में दावा-आपत्ति सुनवाई आयोजित की।

सरपंच ने उठाए गंभीर सवाल

ग्राम के सरपंच जय नंदन सिंह ने आरोप लगाया कि प्रकाशित परिसंपत्ति सूची में कई गंभीर खामियां हैं। उन्होंने कहा, “मेरे स्वयं के परिसंपत्तियों का विवरण भी गलत दर्ज किया गया है। इस तरह की लापरवाही से ग्रामीणों के अधिकारों का हनन हो रहा है। कई लोगों के घर, मवेशी और पेड़ों का विवरण छूट गया है। प्रशासन को हर परिवार की संपत्ति का सही और सटीक सर्वेक्षण करना चाहिए।”

ग्रामीणों की समस्याएं

सुनवाई के दौरान ग्रामीणों ने बताया कि परिसंपत्तियों के प्रकाशन में अनेक त्रुटियां हैं:

घर और मवेशियों की अनदेखी: किसी का घर सूची से छूट गया, तो किसी के मवेशियों का उल्लेख नहीं था।

गलत दर्ज जानकारी: कई ग्रामीणों के पेड़ों की संख्या गलत दर्ज की गई थी।

भूमि स्वामित्व विवाद: वर्तमान में भूमि पर कब्जा किसी और का है, जबकि मुआवजा किसी अन्य के नाम पर दर्ज है।

रजिस्ट्री और खसरा विरोधाभास: कुछ प्रकरणों में रजिस्ट्री तो सही थी, लेकिन बी-वन खसरे में भूमि किसी अन्य के नाम पर दर्ज थी।

पारिवारिक संपत्ति विवाद: जिन परिवारों में चार लोग अलग-अलग घरों में रहते हैं, उनमें केवल एक या दो के घर ही सूची में शामिल थे।

विस्थापन स्थल की जानकारी नहीं

ग्रामीणों ने यह भी शिकायत की कि उन्हें अब तक यह स्पष्ट नहीं बताया गया है कि उनका विस्थापन कहां होगा और उन्हें किस गांव में बसाया जाएगा।

एसडीएम का आश्वासन

एसडीएम बन सिंह नेताम ने कहा कि ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जा रहा है। उन्होंने कहा, “यदि निर्धारित समय में सभी आवेदन प्राप्त नहीं होते, तो प्रभावितों को और समय दिया जाएगा। शासन के नियमों के तहत उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।”

क्या हो पाएगा समस्या का समाधान ?

ग्राम घाटबर्रा में भूमि अर्जन प्रक्रिया को लेकर ग्रामीणों की समस्याएं और प्रशासन के प्रयासों के बीच समाधान की राह तलाशी जा रही है। सरपंच और ग्रामीणों द्वारा उठाए गए सवाल प्रशासन के सामने गंभीर चुनौती पेश कर रहे हैं, जिन्हें सटीक सर्वेक्षण और पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से हल करना अनिवार्य है। अब यह देखने वाली बात है कि क्या हो पाएगा प्रभावितों के समस्या का समाधान ?

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By Chhattisgarh Kranti

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