आदिवासी-किसानों का संघर्ष जारी, सरकार का दमन और कंपनी का दबाव, लेकिन जंगल-जमीन छोड़ने से ग्रामीणों का इनकार जहाँ पेड़ कटे जा चुके है उस जगह साल के पौधों का किया गया रोपण हरिहरपुर, 8 दिसंबर। हसदेव नदी-जंगल बचाओ पदयात्रा, जो 24 नवंबर को बिलासपुर से शुरू हुई थी, 15 दिनों की लंबी यात्रा के बाद आज सरगुजा जिले के आदिवासी बाहुल्य विकास खंड उदयपुर के ग्राम हरिहरपुर में समाप्त हुई। 250 किलोमीटर की इस पदयात्रा के समापन पर एक आदिवासी-किसान सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें पूरे प्रदेश से पर्यावरण प्रेमी नागरिक, सामाजिक कार्यकर्ता, और ग्रामीण जुटे। सम्मेलन में स्थानीय ग्रामीणों ने कहा कि चाहे सरकार जितना भी दमन करे या जेल में डाल दे, वे अपना जंगल और जमीन नहीं छोड़ेंगे। “मर जाएंगे, लेकिन जंगल नहीं देंगे”सम्मेलन में आदिवासियों और किसानों ने स्पष्ट संदेश दिया कि वे अपनी जमीन निजी कंपनी को सौंपने के बजाय मरना पसंद करेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार उनकी सहमति के बिना, संवैधानिक ग्रामसभाओं को नजरअंदाज कर, जबरन जंगल और जमीन छीनकर खदानों के लिए सौंप रही है। पदयात्रा के दौरान संघर्ष और समर्थनइससे पहले, पदयात्रा को तारा बस स्टैंड पर खदान समर्थकों द्वारा रोका गया, जिन्हें पुलिस के हस्तक्षेप के बाद आगे बढ़ने दिया गया। फत्तेपुर होते हुए हरिहरपुर पहुंचने के बाद ग्रामीणों ने पदयात्रियों का भव्य स्वागत किया। इस यात्रा में प्रथमेश मिश्रा, राधेश्याम शर्मा, निर्मला नायक, अजय आयल सिंघानी, और अन्य कार्यकर्ताओं ने सक्रिय भूमिका निभाई। सम्मेलन में उठी आवाजेंसम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रथमेश मिश्रा ने कहा कि यह लड़ाई केवल हसदेव के साथियों की नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश की है। डॉ. सत्यजीत साहू ने इसे मानवता और पर्यावरण बचाने की लड़ाई बताया। उमेश्वर सिंह आमों ने कहा कि कोल कंपनी के मालिक के खिलाफ अपराध अमेरिका तक में दर्ज हो रहे हैं और प्रकृति अन्याय का बदला जरूर लेगी। आलोक शुक्ला ने भाजपा सरकार पर संवैधानिक प्रावधानों और छत्तीसगढ़ विधानसभा के हसदेव बचाने के प्रस्तावों को कुचलने का आरोप लगाया। “तुम काटोगे, हम लगाएंगे”: वृक्षारोपण का संदेशपदयात्रा के समापन के बाद पदयात्रियों और ग्रामीणों ने “तुम काटोगे, हम लगाएंगे” के नारे के साथ उन स्थानों पर साल के पौधों का वृक्षारोपण किया, जहां खदानों के लिए पेड़ काटे गए थे। इसे छत्तीसगढ़ महतारी के प्रति समर्पण के रूप में देखा गया। आंदोलन का भविष्यपदयात्रा के समापन के साथ ही यह संदेश स्पष्ट हुआ कि हसदेव अरण्य बचाने का संघर्ष खत्म नहीं हुआ है। सम्मेलन में तय किया गया कि यह लड़ाई प्रदेशभर में फैलाई जाएगी और जब तक न्यायपालिका से न्याय नहीं मिलता, ग्रामीण और कार्यकर्ता इस आंदोलन को जारी रखेंगे। हसदेव अरण्य बचाओ संघर्ष समिति ने कहा कि यह केवल जंगल और जमीन बचाने की नहीं, बल्कि संविधान, मानवता और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की रक्षा की लड़ाई है। बाल साय कोर्राम ने आलोक शुक्ला पर खड़े किये सवाल – सभा के दौरान स्थानीय निवासी बाल साय कोर्राम ने आलोक शुक्ला पर सवाल उठाते हुए कहा आप आदिवासियों को बेवकूफ बनाते हो पेड़ कटाई के दौरान गायब हो जाते हो आदिवासियों को बेवकूफ बनाना बंद करो यहाँ से वापस चले जाओ, इतने दिन से आन्दोलन हो रहा है पेड़ कटाई रोक पाए क्या ? आलोक शुक्ला के जवाब आलोक शुक्ला ने कहा बालसाय भाई ने सवाल तो किया परन्तु जवाब लिए बिना मंच छोड़कर चले गए उन्होंने कहा फर्जी केस में कम्पनी के लोगों ने फंसाया, उनके खाते सीज कर दिए गए उनके कठिन संघर्षों में हम सब ने साथ दिया यह जानते हुए भी की वह कोल खनन कम्पनी के पक्ष में है , उन्हें इन बातों को भी बताना चाहिए और भी बहुत सी बातें आलोक शुक्ला ने कही परन्तु उस वक्त तक बाल साय कार्यक्रम स्थल से जा चुके थे । यदि आपको इस बातचीत और सभा में हुए पुरे घटनाक्रम के बारे में जानने की दिलचस्पी है तो हमारे यू टयूब चैनल @chhattisgarhkranti पर जाकर 10 दिसंबर को दोपहर १२ बजे के बाद देख सकते है सारे अनकट विडियो उपलोड किये जा रहे है सम्मेलन में उपस्थित प्रमुख लोगइस ऐतिहासिक सम्मेलन में रघुवीर प्रधान (एकता परिषद), अजमत (राष्ट्रीय युवा संगठन), रविशंकर सिंह, संतोष सिंह, महेश चौधरी, और सुषमा पटनायक सहित कई प्रमुख हस्तियां शामिल हुईं। पदयात्रा में भाग लेने वालों में प्रथमेश सविता, राधेश्याम शर्मा, जॉन बोदरा, मिथिलेश बघेल, चंद्रप्रदीप बाजपेयी, सौरभ गुरु तिवारी, संजय सिंघानी, अभिषेक मिश्रा (अकलतरा), विनय गुप्ता (पामगढ़), और ललित बघेल (अमरताल) जैसे नाम प्रमुख रहे। सम्मलेन को सफल बनाने में उमेश्वर सिंह आर्मो, रामलाल करियाम, मुनेश्वर, सुनीता सहित दर्जनों स्थानीय ग्रामीणों का सक्रीय योगदान रहा खबर के बारे में अपने विचारो से कमेन्ट के माध्यम से अवगत जरुर करावें । Post Views: 650 Please Share With Your Friends Also Post navigation सिविल अस्पताल चौक पर अवैध कब्जा बना दुर्घटनाओं का कारण दुकानदारों के शेड निर्माण पर प्रशासन की चुप्पी सवालों के घेरे में अंबिकापुर: चलती ट्रक में लगी आग, स्थानीय लोगों की मदद से टला बड़ा हादसा