क्रांति कुमार रावत की रिपोर्ट

हरिहरपुर, 8 दिसंबर। हसदेव नदी-जंगल बचाओ पदयात्रा, जो 24 नवंबर को नेहरू चौक, बिलासपुर से शुरू हुई थी, ने 250 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए हरिहरपुर के धरना स्थल पर पहुंचकर आज 8 दिसंबर को समापन की ओर बढ़ रही है। पदयात्रा का उद्देश्य हसदेव क्षेत्र के जंगलों को कोयला खदानों के लिए काटे जाने के विरोध में स्थानीय नागरिकों और किसानों को संगठित करना और जागरूकता फैलाना है।

धरना स्थल पर किसान सम्मेलन और आंदोलन की रणनीति
धरना स्थल पर आज एक बड़े किसान सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा, जिसमें आंदोलन की भविष्य की रणनीतियों पर चर्चा होगी। हरिहरपुर में पिछले तीन वर्षों से मूलनिवासी इन खदानों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। इस सम्मेलन में क्षेत्रीय किसानों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, और स्थानीय नागरिकों की बड़ी भागीदारी देखने को मिलेगी।

जनसमर्थन और सामाजिक सहभागिता
पदयात्रा के दौरान विभिन्न गांवों और शहरों में नागरिकों और किसानों ने बढ़-चढ़कर समर्थन दिया। पदयात्रियों ने स्थानीय निवासियों को हसदेव नदी और जंगल के पर्यावरणीय, सांस्कृतिक और आजीविका संबंधी महत्व को समझाया। हर जगह पदयात्रियों का स्वागत फूल-मालाओं और समर्थन के नारों के साथ किया गया।

कोयला खदानों का विरोध जारी
हसदेव क्षेत्र में कोयला खदानों के लिए पेड़ों की कटाई और जंगलों के विनाश के विरोध में यह पदयात्रा एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुई है। प्रशासन द्वारा सुरक्षा बलों की तैनाती के बावजूद इन खदानों का विरोध जारी है। स्थानीय लोग और सामाजिक कार्यकर्ता इसे अपने पर्यावरण और अधिकारों पर खतरा मानते हैं।

संघर्ष का संदेश
हसदेव नदी और जंगल को बचाने के इस आंदोलन ने यह संदेश दिया है कि यह केवल पर्यावरण का मुद्दा नहीं, बल्कि स्थानीय निवासियों की आजीविका और सांस्कृतिक अस्तित्व से भी जुड़ा है। किसान सम्मेलन के बाद पदयात्रा का समापन किया जाएगा, लेकिन हसदेव बचाने के संघर्ष को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता बनी रहेगी।

हसदेव नदी-जंगल बचाओ पदयात्रा: संवैधानिक अधिकारों का हनन, खदान समर्थकों ने तारा बस स्टैंड पर रोका संवैधानिक अधिकारों के हनन का सामना करते हुए आखिरकार पदयात्रा फत्तेपुर होते हुए हरिहरपुर पहुंच गई। पदयात्रा को ग्राम तारा के बस स्टैंड पर खदान समर्थकों द्वारा बाहरी कहकर रोका गया। पुलिस के हस्तक्षेप के बाद यात्रा आगे बढ़कर हरिहरपुर पहंची

चलते चलते जान लीजिये कितना जंगल उजड़ने वाला है और कौन है इसके संचालनकर्ता –

राजस्थान राज्य विद्युत् उत्पादन निगम लिमिटेड को आबंटित निम्नांकित खदान का MDO अदानी कम्पनी के पास है –

वर्तमान में PEKB फेस 2 का सञ्चालन किया जा रहा है साथ ही परसा कोल ब्लाक का कार्य भी लगातार जारी है केते एक्सटेंशन फिलहाल सुसुप्त अवस्था में है नीचे पढ़िए कितना हेक्टेयर जंगल और राजस्व् की जमीन का खदान के लिए उपयोग होगा और जंगल कटेगा

PEKB – 2700 हेक्टेयर

Kete Extension – 1745 हेक्टेयर

PARSA – 1250 हेक्टेयर

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By Chhattisgarh Kranti

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