पप्पू जायसवाल की रिपोर्ट

सूरजपुर, 19 दिसंबर 2024।
विकासखंड रामानुजनगर की माध्यमिक शाला पतरापाली के 80 छात्र-छात्राओं ने अमृतधारा जलप्रपात का शैक्षणिक भ्रमण किया। इस अवसर पर बच्चों ने पर्यटन स्थल अमृतधारा के प्राकृतिक सौंदर्य और भौगोलिक महत्व के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त की।

अमृतधारा जलप्रपात का परिचय

शिक्षक योगेश साहू ने बच्चों को अमृतधारा जलप्रपात के ऐतिहासिक और भौगोलिक महत्व की जानकारी दी। यह प्रसिद्ध जलप्रपात नवीन जिला मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर के मनेंद्रगढ़ तहसील के ग्राम लाई के समीप स्थित है। हसदेव नदी पर बना यह जलप्रपात लगभग 190 फीट ऊंचा और 15 फीट चौड़ा है। इसके पास भगवान शिव का प्राचीन मंदिर स्थित है, और यह क्षेत्र पांचवीं अनुसूची के अंतर्गत आता है।

यहां निवास करने वाली जनजातियों में पंडो, गोंड, बैगा, और चेरवा शामिल हैं। जलप्रपात के पास हर साल महाशिवरात्रि पर आयोजित होने वाला मेला अपनी खास पहचान रखता है, जिसकी शुरुआत 1936 में कोरिया राज्य के राजा रामानुज प्रताप सिंहदेव ने की थी।

जलप्रपात की अद्भुत छटा

अमृतधारा जलप्रपात की जलधारा 90 फीट की ऊंचाई से गिरती है, जो दुधिया सौंदर्य बिखेरती है। घने जंगलों से घिरा यह स्थल पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है। यहां का पुराना नाम विसवाही था, जिसे बाद में कोरिया रियासत के राजा ने बदलकर अमृतधारा रखा। सालभर इस जलप्रपात के मनोरम दृश्य का आनंद लेने के लिए पर्यटक यहां आते हैं।

भ्रमण से बच्चों को लाभ

शैक्षणिक भ्रमण के दौरान बच्चों ने अमृतधारा जलप्रपात की भौगोलिक स्थिति को न सिर्फ देखा बल्कि समझा भी। भ्रमण के माध्यम से बच्चों ने न केवल नई जानकारी प्राप्त की बल्कि यह अनुभव उनके व्यक्तित्व विकास, सामाजिकता और समरसता को भी बढ़ावा देता है।

शैक्षणिक भ्रमण में शिक्षकों का योगदान

भ्रमण के दौरान प्रधानपाठक बी.आर. हितकर, संकुल समन्वयक जी.डी. सिंह, अनीता सिंह, योगेश साहू

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By Chhattisgarh Kranti

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