कहीं आपको भी माखुर (तम्बाखू) खाना महंगा न पड़ जाए, सावधान हो जाइये तस्वीरें आपको विचलित कर सकती है क्रान्ती कुमार रावत / सरगुजा सरगुजा: मेडिकल कॉलेज अस्पताल में एक चौंकाने वाला मामला दो दिन पूर्व सामने आया है, जिसने डॉक्टरों को भी हैरानी में डाल दिया। एक 28 वर्षीय महिला, जो खाने-पीने में तकलीफ और मुंह में जलन की समस्या के कारण अस्पताल पहुंची थी, उसके मुंह में जिंदा कीड़े पाए गए। यह मामला सरगुजा की मेडिकल हिस्ट्री में पहली बार दर्ज हुआ है। डॉक्टरों के खुलासे ने चौंकाया डॉ. शैलेंद्र गुप्ता, ईएनटी विशेषज्ञ ने बताया कि महिला के ओंठ के नीचे जिंदा कीड़े पाए गए। शुरुआत में डॉक्टरों को लगा कि यह कैंसर का मामला हो सकता है, लेकिन जांच में ऐसा कोई संकेत नहीं मिला। यह स्थिति न तो किसी घातक चर्मरोग से जुड़ी थी, न ही नसों के निष्क्रिय होने के कारण। माखुर (तम्बाखू) बना समस्या का मूल कारण महिला के परिवारजनों से पूछताछ में पता चला कि उसे लंबे समय से दांत दर्द था। दर्द से राहत पाने के लिए वह नियमित रूप से माखुर (तम्बाखू) का सेवन करती थी।माखुर (तम्बाखू) का अत्यधिक उपयोग मुंह की नसों को निष्क्रिय कर देता है, जिससे संक्रमण और ऐसे कीड़ों के पनपने की संभावना बढ़ जाती है। कैसे हुई पहचान? महिला को खाने-पीने में दिक्कत और जलन की शिकायत थी। डॉक्टरों ने निरीक्षण के दौरान देखा कि कीड़े महिला के मुंह के ऊतक (टिशू) को खा रहे थे। विशेषज्ञों ने इसे तंबाकू के सेवन से जुड़ा दुर्लभ मामला बताया। महिला का इलाज जारी फिलहाल, महिला का इलाज चल रहा है, और डॉक्टरों को उम्मीद है कि वह जल्द ही स्वस्थ हो जाएगी। डॉक्टरों की सलाह: डॉक्टरों ने इस घटना को गंभीर चेतावनी मानते हुए लोगों से तंबाकू का सेवन न करने की अपील की है। तंबाकू न केवल दांत और मसूड़ों को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि यह मुंह की संरचना को भी प्रभावित कर सकता है। “तंबाकू के कारण नसों की संवेदनशीलता खत्म हो सकती है। इससे मुंह के ऊतक सड़ने लगते हैं और संक्रमण की आशंका बढ़ जाती है। ऐसे मामलों से बचने के लिए तंबाकू से दूर रहना बेहद जरूरी है।” – डॉ. शैलेंद्र गुप्ता, ईएनटी विशेषज्ञ इस घटना ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों को तंबाकू से होने वाले खतरों पर दोबारा सोचने को मजबूर कर दिया है। यह मामला तंबाकू के दुष्प्रभावों का एक ज्वलंत उदाहरण है और समाज के लिए चेतावनी है। Post Views: 1,874 Please Share With Your Friends Also Post navigation दिवंगत पंचायत सचिव की पत्नी को 30 लाख रुपये की आर्थिक सहायता राशि की गई प्रदान फिर हुई हाथी की मौत: वन विभाग जांच में जुटा, लापरवाही पर उठे सवाल