आदेश की अनदेखी या प्रशासन की लापरवाही?

संत तारण तरण जयंती के अवसर पर नगर निगम अंबिकापुर के आदेशानुसार सरगुजा जिले में पशुवध गृह बंद रखने और मांस, मछली, बकरा, बकरी, मुर्गा-मुर्गी की बिक्री पर प्रतिबंध लगाया गया था। इस संबंध में प्रशासन द्वारा प्रेस विज्ञप्ति जारी कर प्रतिबंध की जानकारी दी गई थी। बावजूद इसके, लखनपुर के साप्ताहिक बाजार में प्रतिबंध के दिन मांस, मछली, मुर्गा और बकरा की खुलेआम बिक्री होती रही।

प्रशासनिक आदेश की अवहेलना

नगर निगम अंबिकापुर ने 27 नवंबर को पशुवध और मांस बिक्री पर रोक के स्पष्ट निर्देश दिए थे। लेकिन लखनपुर साप्ताहिक बाजार में मांस विक्रेताओं ने इन निर्देशों को अनदेखा कर बिक्री जारी रखी। यह सवाल खड़ा करता है कि जब अंबिकापुर में प्रतिबंध पूरी सख्ती से लागू था, तो लखनपुर में इसे नजरअंदाज कैसे किया गया?

प्रश्नों के घेरे में स्थानीय प्रशासन

लखनपुर बाजार में मांस की दुकानों के संचालन और बिक्री को लेकर यह स्पष्ट नहीं है कि स्थानीय प्रशासन ने इसे रोकने के लिए कोई कदम उठाया या नहीं। यह भी अज्ञात है कि क्या प्रतिबंध केवल अंबिकापुर तक सीमित था या पूरे सरगुजा जिले में लागू था।

ग्रामीणों और श्रद्धालुओं में नाराजगी

संत तारण तरण जयंती के पवित्र अवसर पर मांस की बिक्री से स्थानीय श्रद्धालुओं और ग्रामीणों में नाराजगी देखी गई। उनका कहना है कि प्रशासन को ऐसे विशेष अवसरों पर सख्ती बरतनी चाहिए और धार्मिक भावनाओं का सम्मान करना चाहिए।

क्या होगी कार्रवाई?

अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है। क्या लखनपुर में नियमों का पालन कराने में लापरवाही बरती गई, या आदेश ही स्पष्ट नहीं था? स्थानीय प्रशासन और उच्च अधिकारियों से इस पर जवाबदेही की अपेक्षा की जा रही है।

इस घटना ने प्रशासनिक व्यवस्था और आदेशों के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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By Chhattisgarh Kranti

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