कटघोरा वन मंडल के केदाई रेंज अंतर्गत ग्राम पंचायत पातुरियाडांड के मलाकमाड़ जंगल में वन विभाग की लापरवाही और मिलीभगत से बड़े पैमाने पर हरे-भरे पेड़ों की अवैध कटाई जारी है। यह जंगल ग्राम पंचायत अरसिया से सटा हुआ है और जैव विविधता के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।ग्रामीणों और सामुदायिक वन प्रबंधक समिति के अध्यक्ष, सचिव व अन्य सदस्यों ने आरोप लगाया कि वन विभाग के अधिकारी ठेकेदारों के साथ मिलकर साल, साजा, दूड़ा, सलैया और चार सहित 84 पेड़ों की अवैध कटाई कर रहे हैं। इन लकड़ियों का उपयोग पुल निर्माण में लगने वाली शटरिंग के लिए किया जा रहा है। इस पुलिया के निर्माण की लागत मात्र 3.50 लाख रुपये बताई जा रही है, लेकिन इसके लिए बड़े पैमाने पर वन संपदा को नुकसान पहुंचाया जा रहा है।

पहले भी की गई शिकायत, लेकिन कोई कार्यवाही नहीं- वन प्रबंधक समिति के अध्यक्ष ने इस अवैध कटाई के खिलाफ 26 मार्च को मोरगा रेंज कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन वन विभाग ने कोई कार्यवाही नहीं की। प्रशासन की निष्क्रियता से आक्रोशित समिति ने 29 मार्च को दोबारा लिखित शिकायत दर्ज कराई, लेकिन वन विभाग के अधिकारियों ने अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया।

जंगलों की बर्बादी से संकट में पर्यावरण और आजीविका- गांवों के ग्रामीणों ने वन विभाग की इस मिलीभगत और लापरवाही पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि जंगल उनकी आजीविका का मुख्य स्रोत हैं और यह वन्यजीवों के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है। यदि इसी तरह वन विभाग खुद जंगलों का सफाया करता रहा, तो पर्यावरण को भारी नुकसान होगा।

रेंज अधिकारी ने फोन नहीं उठाया, प्रशासन पर उठे सवाल- इस मामले को लेकर जब रेंज अधिकारी अभिषेक दुबे से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। इससे समिति में और अधिक आक्रोश है। वन विभाग की चुप्पी और अधिकारियों की उदासीनता से यह साफ होता है कि जंगलों की अवैध कटाई में उच्च स्तर तक मिलीभगत है।

ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की अपील की है। अब देखना होगा कि क्या प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर कोई ठोस कदम उठाएगा या फिर वन माफियाओं की मिलीभगत से जंगलों का विनाश यूं ही जारी रहेगा।

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By Chhattisgarh Kranti

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