MP – भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के तहत सांस्कृतिक श्रोत प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें देश के विभिन्न राज्यों से शिक्षकों का चयन किया गया है। मध्य प्रदेश के दमोह जिले में शिक्षकों को प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत संरक्षण के विषय में प्रशिक्षण दिया जा रहा है।इस कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ की टीम ने भी भाग लिया, जिसमें उन्होंने छत्तीसगढ़ी व्यंजनों की प्रदर्शनी और विभिन्न लोकगीतों का प्रस्तुतिकरण किया। कार्यक्रम में 10 राज्यों के प्रतिभागी शामिल हैं, जो अपनी-अपनी संस्कृति की प्रस्तुति दे रहे हैं।छत्तीसगढ़ टीम के प्रस्तुतिकरण में सुवा, कर्मा, जस गीत, भोजली, तीज पोरा गीत, हरेली गीत, पंथी, रावतनाचा, नाचा गीत आदि शामिल थे। कार्यक्रम की प्रारंभ छत्तीसगढ़ राज्य गीत अरपा पैरी के धार से हुई।इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य अपने आसपास की सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत को लोगों तक पहुंचाना है। छत्तीसगढ़ टीम के प्रस्तुतिकरण को सभी ने सराहा। इस कार्यक्रम से देश की विभिन्न संस्कृतियों के बीच आदान-प्रदान और समझ बढ़ेगी।कार्यक्रम में शामिल सभी राज्यों के प्रतिभागी अपने-अपने संस्कृति की विशेषताओं को साझा कर रहे हैं। यह कार्यक्रम देश की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने और उसे आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इस कार्यक्रम के माध्यम से देश के विभिन्न हिस्सों में सांस्कृतिक आदान-प्रदान हो रहा है, जिससे देश की एकता और अखंडता को बढ़ावा मिल रहा है।कार्यक्रम के प्रारंभ में छत्तीसगढ़ के राज्य गीत अरपा पैरी के धार से प्रतिभागियों ने प्रस्तुति शुरू की। इस कार्यक्रम के लिए छत्तीसगढ़ राज्य के अलग अलग जिलों से 10 लोगों का चयन किया गया जिसमें रायपुर से राजेश शर्मा, श्रीमती जिया पटेल, सरगुजा से विपिन बिहारी गहवई ,जांजगीर से चित्रकांत पांडे , बलौदा बाजार से जगदीश साहू, धमतरी से श्रीमती ममता साहू, बिलासपुर से श्रीमती मंजूलता मेरसा ने इस प्रशिक्षण में अपनी भागीदारी दी है। इस प्रशिक्षण में 10 राज्य बिहार कर्नाटका, तमिलनाडु, हिमाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़, हरियाणा ,उड़ीसा,मध्यप्रदेश, गोवा, राजस्थान से प्रतिभागी आए हुए है । Post Views: 268 Please Share With Your Friends Also Post navigation उत्कृष्ट कार्यों के लिए राज्यपाल पुरस्कार से सम्मानित होंगी सरगुजा की ये शिक्षिकाएँ निजी विद्यालय के प्राचार्यों को सुझाव एनसीईआरटी की किताबों से हो पढ़ाई ताकि अभिभावकों पर ना पड़े अतिरिक्त भार