साहसी और जांबाज पत्रकार थे मुकेश चंद्राकर बीजापुर (बस्तर)।सच के लिए आवाज उठाने वाले जांबाज पत्रकार मुकेश चंद्राकर की निर्मम हत्या ने पूरे पत्रकारिता जगत को झकझोर कर रख दिया है। नक्सल प्रभावित इलाके बीजापुर से काम करने वाले मुकेश ने 30 दिसंबर को एनडीटीवी पर ठेकेदार सुरेश चंद्राकर द्वारा 120 करोड़ रुपये के सड़क निर्माण घोटाले की खबर प्रसारित की थी। जानलेवा हमला और शव को सेप्टिक टैंक में छिपाया गयायह खबर ही उनकी हत्या का कारण बन गई। 1 जनवरी को उनकी हत्या से पहले उन पर धारदार हथियारों से क्रूर हमला किया गया। हमलावरों ने उन्हें तड़पा-तड़पा कर मारा और फिर शव को सेप्टिक टैंक में डालकर प्लास्टर कर दिया। यह हत्या न केवल उनकी सच्चाई की आवाज को दबाने का प्रयास था, बल्कि भविष्य में विरोध करने वालों को चेतावनी भी थी। मुकेश के मोबाइल पर आखिरी कॉल ठेकेदार सुरेश चंद्राकर के भाई रितेश की थी। इस कड़ी ने हत्या के पीछे की साजिश की ओर इशारा किया है। पत्रकारों की बढ़ती हत्याएं और प्रशासनिक गठजोड़ का पर्दाफाशभारत में 2004 से 2024 तक 80 पत्रकारों की हत्या हो चुकी है। इन हत्याओं में अपराधियों, विधायिका और भ्रष्ट प्रशासन का गठजोड़ उजागर हुआ है। विशेष रूप से 2014 के बाद पत्रकारों पर हमलों में तेजी आई है। हाल के वर्षों में पत्रकारों की हत्याएं: 2024: दिलीप सैनी (फतेहपुर, यूपी), सलमान खान (राजगढ़, एमपी), गौरव कुशवाहा (मुजफ्फरपुर, बिहार)। 2023: सुधीर सैनी (सहारनपुर, यूपी), बिमल कुमार यादव (अररिया, बिहार)। 2022: महाशंकर पाठक (सुपौल, बिहार), सुभाष महतो (बेगूसराय, बिहार)। 2021: रमन कश्यप (लखीमपुर खीरी, यूपी)। इन हत्याओं के बावजूद अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। हर हत्या के बाद प्रशासन न्याय का आश्वासन देता है, लेकिन नतीजे ढाक के तीन पात साबित होते हैं। पत्रकार सुरक्षा कानून की मांगभू-माफिया, खनन माफिया, राजनीतिक माफिया और भ्रष्ट प्रशासन के खिलाफ खबर करने वाले पत्रकारों को आए दिन धमकियां मिलती हैं। इस माहौल में निर्भीक पत्रकारिता करना जोखिम भरा हो गया है। पत्रकार समाज आक्रोशित और उद्देलित है। पत्रकारों की स्वतंत्रता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए देश में सशक्त पत्रकार सुरक्षा कानून लागू करने की मांग जोर पकड़ रही है। ऐसे कानून की जरूरत है जो सच्चाई की आवाज उठाने वाले पत्रकारों को हर हाल में संरक्षण प्रदान करे। जो अन्याय के खिलाफ लिखेगा, सच को सामने लाएगा, उसकी आवाज को दबाने के प्रयास किए जाएंगे, साहसी और जांबाज पत्रकार थे मुकेश चंद्राकर उक्त उद्गार व्यक्त किये है – राकेश प्रताप सिंह परिहार (कार्यकारी अध्यक्ष, अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा समिति) बिलासपुर ने Post Views: 368 Please Share With Your Friends Also Post navigation पत्रकार मुकेश चंद्राकर की हत्या: एसपी, कलेक्टर को निलंबित करने और सीबीआई जांच की मांग, छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन ने कहा – यह राजनेताओं, अधिकारियों और माफियाओं के गठजोड़ का नतीजा ग्राम डाडकेसरा में लोनर हाथी का आतंक, ग्रामीण दहशत में, फसल को पहुंचाया नुकसान, फॉरेस्ट विभाग की सुस्ती पर ग्रामीण नाराज़